अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाने हैं। वहीं, शांति समझौते की घोषणा के बीच पहले भारतीय एलएनजी टैंकर दिशा ने सोमवार को होर्मुज जलमार्ग को पार किया।

सरकारी स्वामित्व वाली शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) द्वारा संचालित दिशा पिछले दो महीनों में होर्मुज जलमार्ग को पार करने वाला पहला भारतीय कमर्शियल जहाज है। यह भारत के लिए कतर से एलएनजी ले जा रहा है। डेटा के अनुसार, शांति समझौते की घोषणा के बाद जलमार्ग को पार करने वाला यह पहला जहाज है। शिपिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जलमार्ग से यातायात के सुचारु रूप से चलने में कई हफ्ते लग सकते हैं। वह भी तब जब शांति समझौता कायम रहेगा।

तीन महीने से फारस की खाड़ी में फंसा हुआ था ‘दिशा’

भारत के सबसे बड़े एलएनजी आयातक पेट्रोनेट एलएनजी के लिए एलएनजी ले जा रहा माल्टा-ध्वज वाला जहाज दिशा, पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान तीन महीने से अधिक समय से फारस की खाड़ी में फंसा हुआ था। दिशा के जलमार्ग पार करने के साथ ही होर्मुज जलमार्ग के पश्चिम में स्थित फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की संख्या अब 13 हो गई है। मार्च की शुरुआत से अब तक कुल 10 भारतीय जहाज जिनमें से नौ भारतीय ध्वज वाले थे, इस जलमार्ग को पार कर चुके हैं।

दिशा 62 हजार मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो ले जा रहा

जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा, “अभी की स्थिति में, भारतीय शिपिंग निगम के नेतृत्व वाले एक समूह द्वारा संचालित एलएनजी वाहक पोत दिशा ने होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है और वह 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो ले जा रहा है। पोत के भारत आने पर18 जून को दाहेज में प्रवेश करने की उम्मीद है।” उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही जलमार्ग खुलता है और नौकायन के लिए सुरक्षित घोषित किया जाता है, सरकार फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को वापस लाने के लिए तैयार है।

सरकार के राजनयिक प्रयासों के कारण मार्च के मध्य से शुरू होकर कई हफ्तों तक कुछ भारतीय जहाज होर्मुज जलमार्ग से गुजरे लेकिन 18 अप्रैल की घटना के बाद भारतीय और भारत जाने वाले जहाजों का आवागमन ठप्प हो गया। इस दौरान जलमार्ग पार करने की कोशिश कर रहे कुछ भारतीय जहाजों पर ईरानी सेना ने गोलीबारी की थी।

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अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किया गया सैन्य अभियान अब खत्म हो चुका है। लगभग चार महीने बाद दोनों पक्ष पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्ध समाप्त करने पर सहमत हो गए हैं। 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक वर्चुअल हस्ताक्षर समारोह के जरिए शांति समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की योजना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें