भारत जाकर मानवाधिकार, लोकतंत्र का मुद्दा उठाएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री- बाइडेन प्रशासन का ऐलान

बताया गया है कि इस दौरे में ब्लिंकन चार देशों के क्वाड गठबंधन (अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान) के राष्ट्राध्यक्षों के बीच पहली आमने-सामने होने वाली वार्ता की जमीन तैयार करेंगे।

Antony Blinken, S Jaishankar
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इससे पहले कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के एस जयशंकर से मुलाकात कर चुके हैं, पर भारत में यह दोनों की पहली मुलाकात होगी। (फोटो- ट्विटर/AntonyBlinken)

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अगले हफ्ते अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान भारतीय नेतृत्व के सामने मानवाधिकार और लोकतंत्र के मुद्दे उठाएंगे। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक दोनों देश इन मोर्चों पर अन्य की तुलना में अधिक समान मूल्य साझा करते हैं।

ब्लिंकन 27 जुलाई को नई दिल्ली पहुंचेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद ब्लिंकन की यह पहली भारत यात्रा होगी। अपनी यात्रा के दौरान, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी ब्लिंकन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों पक्ष कोरोनावायरस महामारी से उबरने और अफगानिस्तान के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति सहित कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

बताया गया है कि इस दौरे में ब्लिंकन चार देशों के क्वाड गठबंधन (अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान) के राष्ट्राध्यक्षों के बीच पहली आमने-सामने होने वाली वार्ता की जमीन तैयार करेंगे। इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच इस साल के अंत में 2+2 मीटिंग भी होनी है, जिसे लेकर दोनों देश चर्चा करेंगे।

अधिकारी बोले- मानवाधिकार के मुद्दे पर होगी बातचीत: दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के कार्यवाहक उप मंत्री डीन थॉम्पसन ने ब्लिंकन की यात्रा से पहले कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान संवाददाताओं को बताया, “मानवाधिकारों और लोकतंत्र के प्रश्न के संबंध में आपका पूछना सही है, हम इन मुद्दों को उठाएंगे और हम इस बातचीत को जारी रखेंगे क्योंकि हम दृढ़ता से मानते हैं कि इन मोर्चों पर हमारे मूल्य अन्य किसी भी मोर्चे की तुलना में ज्यादा समान हैं।”

थॉम्पसन ने एक सवाल के जवाब में कहा, “हमारा मानना है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, भारत उन बातचीत को जारी रखने और साझेदारी में उन मोर्चों पर मजबूत प्रयास करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।” भारत ने इससे पहले देश में नागरिक स्वतंत्रता घटने के विदेशी सरकारों और मानवाधिकार समूहों के आरोपों पर की जा रही आलोचना को खारिज किया है।

पेगासस जासूसी का मुद्दा भी उठाएगा अमेरिका: उन्होंने पेगासस जासूसी के मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘‘नागरिक संगठन, या सत्ता के आलोचकों अथवा पत्रकारों या ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ न्यायेतर तरीकों से ऐसी तकनीक के उपयोग की पूरी अवधारणा हमेशा चिंता का विषय रही है।’’ भारत में पेगासस के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर थॉम्पसन ने कहा, ‘‘मुझे भारत के मामले में कोई खास गहरी जानकारी नहीं है। मैं जानता हूं कि यह एक व्यापक मुद्दा है, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि हमने हमेशा कहा है कि कंपनियों को ऐसे तरीके तलाशने चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल इस तरीके से नहीं हो। हम लगातार उन मुद्दों को उठाते रहेंगे।’’

पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी पर यह रहा अमेरिका का पक्ष: इससे पहले अमेरिका ने कहा है कि वह नागरिक संगठनों, सत्ता के आलोचकों और पत्रकारों के खिलाफ ‘‘न्यायेतर तरीकों से’’ जासूसी प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल के विरुद्ध है। हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट किया कि उसे भारत में चल रहे पेगासस विवाद के संबंध में कोई खास गहरी जानकारी नहीं है।

ये रहा भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान: उधर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि ब्लिंकन की यात्रा उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता को जारी रखने और भारत-अमेरिका वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का एक अवसर है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘दोनों पक्ष मजबूत और बहुआयामी भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और उन्हें और मजबूत करने की क्षमता की समीक्षा करेंगे।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘चर्चा आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित होगी जिसमें कोविड-19 महामारी से उबरना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अफगानिस्तान और संयुक्त राष्ट्र में सहयोग शामिल है।’’

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट