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Kaifi Azmi Google Doodle: उर्दू के अजीम शायर कैफी आजमी की आज 101वीं जयंती, Google Doodle बनाकर कर रहा याद

तस्वीर में आजमी साहब सफेद रंग के लिबास में माइक पर कुछ शायरी या नज्म पढ़ते दिखाए गए हैं, जबकि पीछे बैकग्राउंड में खूबसूरत अंदाज में अंग्रेजी में गूगल लिखा हुआ है।

अमेरिकी इंटरनेट सर्च इंजन Google के होमपेज पर आज यह डूडल नजर आ रहा है, जिसमें उर्दू के नामी शायर कैफी आजमी का चित्र बना है।

Kaifi Azmi Google Doodle: उर्दू के अजीम शायर कैफी आजमी की आज (14 जनवरी, 2020) 101वीं जयंती है। देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में उन्हें चाहने वाले इस खास मौके पर याद कर रहे हैं। इसी बीच, अमेरिकी इंटरनेट सर्च इंजन Google ने भी उन्हें खास अंदाज में याद किया है।

गूगल ने अपने होम पेज पर डूडल के रूप में उनका चित्र बनाया है। तस्वीर में आजमी साहब सफेद रंग के लिबास में माइक पर कुछ शायरी या नज्म पढ़ते दिखाए गए हैं, जबकि पीछे बैकग्राउंड में खूबसूरत अंदाज में अंग्रेजी में गूगल लिखा हुआ है।

शेरो-शायरी के अलावा आजमी गीत और स्क्रीनप्ले (बॉलीवुड भी) भी लिखते थे। साथ ही सामाजिक मुद्दों को लेकर भी मुखर होकर आवाज बुलंद करते थे। आजमी साहब ने पहली शायरी 11 साल की उम्र में लिखी थी। जानी-मानी हिंदी सिनेमा अदाकारा शबाना आजमी उनकी बेटी हैं।

पिता फैफी आजमी के साथ फिल्म अदाकारा शबाना आजमी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

आजमी का असल नाम सैयद अथर हुसैन रिजवी (Syed Athar Hussain Rizvi) था। वह 1919 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पैदा हुए थे। महात्मा गांधी के 1942 में ‘क्विट इंडिया मूवमेंट’ के दौर में वह पढ़े-बढ़े और उससे खासा प्रभावित हुए। बाद में वह मुंबई शिफ्ट हो गए, जहां वह एक उर्दू अखबार के लिए लिखते थे।

झंकार उनकी शायरी/कविताओं का पहला संग्रह था, जो साल 1943 में प्रकाशित हुआ था। वह इसके बाद प्रगदिशील लेख संघ (Progressive Writers’ Association) के सदस्य भी बने। यही नहीं, उन्हें अपने शानदार काम के लिए ढेर सारे पुरस्कार भी मिले, जिनमें तीन फिल्मफेयर पुरस्कार (Filmfare Awards), पद्म श्रीअवॉर्ड (Padma Shri Award) – साहित्य और शिक्षा के लिए व साहित्य अकादमी फेलोशिप (Sahitya Akademi Fellowship) से भी नवाजा गया था।

आजमी के शुरुआती काम में ‘औरत’ (Aurat) भी है, जिसमें उन्होंने नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।

उन्होंने इसके अलावा एक गैर सकारी संस्था (NGO) की स्थापना भी की, जो कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं और परिवारों को जीवन और शिक्षा स्तर में सुधार लाने को लेकर काम करता था।

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