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पाकिस्तान ने LoC पर बढ़ाई तैनाती, सेना ने दी मोदी सरकार को तत्काल सैन्य कार्रवाई नहीं करने की सलाह

माना जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अलग से भी मुलाकात की।

प्रधानमंत्री आवास पर19 सितंबर को हुई बैठक में मौजूद मंत्री व अधिकारी। (Source: Twitter/Narendra Modi)

रविवार (18 सितंबर) को जम्मू-कश्मीर के उरी स्थित एक आर्मी कैम्प में हुए आतंकी हमले में 18 जवानों के मारे जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अन्य मंत्रियों ने सोमवार को इस मसले पर सेना और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार सैन्य अधिकारियों ने सरकार को जल्दबाजी में सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी। सेना के उच्च अधिकारियों ने सरकार से कहा कि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अपनी रक्षात्मक उपाय कर लिए हैं। बैठक में हुई बातचीत के बारे में ज्यादा जानकारी बाहर नहीं आई है। सैन्य अधिकारियों ने सरकार को पाकिस्तान पर तत्काल सैन्य हमला करने के खिलाफ राय दी। इस बैठक में पीएम मोदी के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, वित्त मंत्री अरुण जेटली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, थल सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग, इत्यादि शामिल थे। बैठक में जिहादियों के नेटवर्क और पाकिस्तानी सेना आधारभूत ढांचे का जवाब देने के लिए दीर्घकालिक विकल्पों पर चर्चा की गई। सोमवार को ही पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पूरे मामले की जानकारी दी।

सोमवार को हुई बैठक में वायु सेना प्रमुख अरुप राहा मौजूद नहीं थे। राहा चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख हैं। उनकीि गैर-मौजूदगी से अनुमान लगाया कि सरकार फिलहाल एलओसी पर हवाई हमले के बारे में नहीं सोच रही है। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आंतकी हमले के बाद वायु सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित जिहादी प्रशिक्षण कैम्पों पर हमले की विस्तृत योजना बनाई थी। वायु सेना ने खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर कई बार इसका पूर्वाभ्यास भी किया था।

श्रीनगर से मुजफ्फराबाद जाने वाली बस सेवा के जारी रहने से भी दिल्ली स्थित विदेशी राजनयिक अनुमान लगा रहे हैं कि भारत सरकार तत्काल एलओसी पर संघर्ष नहीं तेज करेगी। सूत्रों के अनुसार जनरल दलबीर सिंह ने सरकार को मौके पर तैनात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मिली सूचना के आधार पर सरकार को सलाह दी। जनरल सिंह ने रविवार को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार सैन्य अधिकारियों ने सरकार से कहा कि रविवार से पाकिस्तान को काफी वक्त मिल चुका है और वो एलओसी के पास अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। ऐसे में जवाबी कार्रवाई ज्यादा जोखिम भरी होगी। इसके अलावा इस वक्त अगर हमला किया गया तो सीमापार से घुसपैठ की आशंका बढ़ जाएगी जिससे कश्मीर में पहले से सक्रिय जिहादी गुटों को मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने पीएम मोदी के साथ अलग से भी मुलाकात की।

सूत्रों के अनुसार फिलहाल भारत सरकार हमले के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना चाहती है। इसमें सरकार अमेरिका समेत अन्य देशों की भी मदद लेगी। वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई की इस्लामाबाद से आई रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल राहिल शरीफ ने अपने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों उरी हमले के बाद उपजे हालात में “सावधान” रहने के लिए कहा है। एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के एक बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान परोक्ष या अपरोक्ष सभी खतरों के लिए तैयार है। सेन्य अधिकारियों ने इशारा किया था कि हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद हो सकता है। लेकिन आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मैट्रिक्स-शीट से संकेत मिलता है कि इसमें लश्कर-ए-तैयबा का भी हाथ हो सकता है।

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