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उरी हमले में शहीद सिपाही की मां और पत्नी का आरोप- सांसद ने घर आकर किया अपमान, बना दिया भिखारी

शहीद की मां ने कहा कि सांसद के साथ आए लोगों ने तौलिया फैला रखा था जिस पर राहगीर 10 रुपये, 50 रुपये और 100 रुपये के नोट फेंक रहे थे।
उरी आतंकी हमले में मारे गए शहीद (ANI File Photo)

जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले में मारे गए एक शहीद के परिवार ने भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय सांसद पर उनका “अपमान करने का आरोप लगाया है।” शहीद के परिवारवालों का कहना है कि बीजेपी नेता के लोगों ने उनके घर के सामने ही उनकी मदद के लिए “भीख” इकट्ठा कर रहे थे जैसे कि उनका परिवार “भिखारी” हो। शहीद सिपाही गणेश शंकर यादव की मां कलावती देवी के अनुसार मंगलवार (20 सितंबर) को संत कबीर नगर के सांसद शरत त्रिपाठी ने “उनके नायक परिवार को भिखारी में बदल दिया।” कलावती देवी के अनुसार, “वो अपने दर्जनों समर्थकों के साथ आए और हमसे कहा कि हम मातम मनाना छोड़कर उनकी आगवानी करें।” कलावती देवी ने मीडिया को द टेलीग्राफ को बताया, “वो यहां करीब आधा घंटा रहे। अचानक हमने देखा कि उनक साथ आए लोग हमारे घर के आसपास लोगों से हमारी मदद के लिए पैसा देने के कह रहे हैं। कुछ ने तौलिया फैला रखा था जिस पर राहगीर 10 रुपये, 50 रुपये और 100 रुपये के नोट फेंक रहे थे।”

धुरपल्ली गांव में रहने वाली कलावती ने बताया कि सांसद के साथ आए लोग गांव के नहीं थे। उरी हमले के बाद से ही शहीद के घर पर आने जाने वालों का तांता लगा हुआ है। कलावती ने कहा कि पूरा गांव सांसद से नाराज है। शहीद गणेश शंकर की पत्नी गुड़िया यादव ने कहा, “हमने पैसे नहीं मांगे थे। हमें केवल उचित सम्मान चाहिए। लेकिन उन्होंने (सासंद) उस शहीद का अपमान किया जिसने देश के लिए अपनी जान दे दी।” इससे पहले कलावती ने मीडिया से कहा था कि उनके बेटे की जान “देश की राजनीति के कारम गई है।” कलावती ने कहा था कि राजनीतिक दल चुनाव से पहले आते हैं कहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाएगा लेकिन जब वो सत्ता में आ जाता हैं तो कूटनीतिक चाल खेलने लगते हैं।

गणेश के रिश्तेदार अर्जुन यादव कहते ने मीडिया से कहा, “हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हमारे नेता कभी जनता का सम्मान नहीं कर सकते। ये हमारे जीवन का सबसे अपमानजनक अनुभव था।”

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  1. अनिल संत
    Sep 23, 2016 at 11:28 am
    वोट जाती और धर्म के आधार पर नहीं उनके ( नेताओ के ) चरित्र के आधार पर कीजिये आप लोगो से उम्मीद है
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    1. Hari Dutt
      Sep 23, 2016 at 4:20 am
      नेता अपने बच्चों को फ़ौज मैं नहीं भेजते. तभी कोई कारगर कदम नहीं उठाते, कानून बने की बॉर्डर पर पांच साल की सुरक्षा ड्यूटी करने वाला ही MP या MLA का चुनाव लड़ सके, तभी जवानों की जान की कीमत लोगों को समझ आएगी ! वातानुकूलित कमरों मैं बैठकर बढ़िया भाषण देने वाली खिलाडियों को एक करोड़ देते हैं, जान गवाने वालों के परिवारों का अपमान करते हैं ! असल मैं फोजी की जान की उनकी नजरों मैं कोई कीमत ही नहीं है !
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