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उरी हमला: जहां मार गिराया था, सेना ने वहीं दफन कराए चारों आतंकी

एक अधिकारी ने बताया कि पोस्ट-मॉर्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार सभी आतंकियों की उम्र 25 के आसपास थी।

Author September 20, 2016 1:11 PM
उरी में सेना के जिस आर्मी बेस पर हमला हुआ था उसके बाहर का दृश्य। ( PTI Photo)

सोमवार (19 सितंबर) की शाम को रविवार तड़के उरी स्थित ब्रिगेड मुख्यालय के एक आर्मी कैम्प पर हमला करने वाले चार आतंकियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हमले में 18 भारतीय जवान शहीद और 20 अन्य जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई  में चारों आंतकी मारे गए।  एक स्थानीय नागरिक ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “सेना ने पुलिस और कस्बे के 8-10 लोगों को बुलया और उन्हें उनके शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपे। सेना नहीं चाहती थी कि उनके शव पहले पहले बाहर न भेजे जाएं, उन्हें सीधे दफन करने के समय ही बाहर ले जाया जाए।” सेना ने अपना सर्च ऑपरेशन पूरा करने के बाद ही आतंकियों का शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपा। एक अन्य स्थानीय नागरिक ने बताया कि “सेना और स्थानीय प्रशासन को आशंका थी अगर आतंकियों के शव को पोस्ट-मॉर्टम और अंतिम संस्कार के लिए बाहर ले जाया गया तो भीड़ जुट सकती है क्योंकि लोगों में घटना को लेके काफी जिज्ञासा थी। उन्हें लग रहा था कि विरोध प्रदर्शन भी संभव हैं।” स्थानीय नागरिक ने कहा, “भीड़ इकट्ठा होने पर कुछ भी हो सकता है। इसलिए सेना या प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता था।”

सोमवार सुबह जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य सेवा विभाग की एक ऐंबुलेंस ब्रिगेड मुख्यालय गई। स्वास्त्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना ने उनसे चार डाक्टरों की टीम भेजने का अनुरोध किया था जो मारे गए आतंकियों का पोस्ट-मॉर्टम कर सकें। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पोस्ट-मॉर्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार सभी आतंकियों की उम्र 25 के आसपास थी।” स्थानीय नागरिकों के अनुसार उरी बाजार कमेटी के सदस्य, एक इमाम और कुछ वरिष्ठ स्थानीय नागरिकों को आंतकियों का अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम जांच के लिए उरी पहुंच चुकी थी। उसने भी आतंकियों के शवों की पड़ताल की उसके बाद ही उन्हें अंतिम संस्कार के लिए सौंपा गया। एक स्थानीय नागरिक के अनुसार जिन लोगों ने आंतकियों का अंतिम संस्कार किया उन्हें उनके चेहरे देखने की इजाजत नहीं थी। स्थानीय नागरिक के अनुसार, “उन्होंने शव लिए, नमाज-ए-जनाजा पढ़ा और तुरत-फुरत उन्हें दफना दिया।” सेना आम तौर पर विदेशी आंतकियों के शव को उरी से 25 किलोमीर दूर स्थित उत्तरी कश्मीर के एक कब्रगाह में दफन करवाती है जो खास इसी मकसद के लिए बनाई गई है।

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