Bihar News: बिहार के शेखपुरा जिले के एक युवक ने दावा किया था कि उसने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल की है। स्थानीय नेताओं और पुलिस ने उसका सम्मान किया, लेकिन बाद में लोगों को पता चला कि उसका दावा झूठा था। अधिकारियों ने बताया कि तब से वह लापता है।

अरियारी ब्लॉक के महूली पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले फतेहपुर गांव के रहने वाले रंजीत कुमार ने 6 मार्च को UPSC के अंतिम नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद गांव वालों और स्थानीय प्रतिनिधियों को बताया कि उसने 440वीं रैंक हासिल की है। यह दावा तेजी से पूरे गांव और आस-पास के इलाकों में फैल गया, जिससे जश्न का माहौल बन गया और सम्मान समारोहों का सिलसिला शुरू हो गया। इन कार्यक्रमों में उसे माला पहनाई गई, शॉल, गुलदस्ते और दूसरे तोहफे दिए गए और उसे एक सफल सिविल सेवा उम्मीदवार और स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा के तौर पर पेश किया गया।

इन सभाओं में दिए गए भाषणों के वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन भाषणों में कुमार ने लगन और लक्ष्य तय करने के बारे में बात की। उसने छात्रों से कहा कि “जब कोई इंसान अपने लक्ष्य को साफ तौर पर देख लेता है, तो सफलता का रास्ता आसान हो जाता है” और उसने कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसे के महत्व पर जोर दिया। उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान अपने संघर्षों को याद करते हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा का स्रोत बताया।

कैसे खुली दावे की पोल

स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी इस जश्न में हिस्सा लिया। आरजेडी के पूर्व विधायक विजय सम्राट गांव आए और रंजीत कुमार को माला और गुलदस्ता भेंट करके सम्मानित किया, जबकि गांव वालों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। स्थानीय मुखिया और गांव के दूसरे लोगों ने भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए। यहां तक कि महूली पुलिस स्टेशन ने भी उसका सम्मान किया। थाने के इंचार्ज ने रंजीत कुमार को बुलाया और वहां उसका सम्मान किया। लेकिन, 10 मार्च को तब शक पैदा हुआ जब कुछ लोगों ने आयोग की वेबसाइट पर UPSC की आधिकारिक मेरिट लिस्ट देखी। उन्हें पता चला कि AIR 440 कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर के रंजीत कुमार आर ने हासिल की थी, न कि बिहार के किसी व्यक्ति ने।

गांव वालों ने मांगी सफाई

इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद गांव वालों ने रंजीत कुमार से सफाई मांगी। चौधरी दरगाह पंचायत के पूर्व मुखिया सरफराज आलम ने बताया कि इस गड़बड़ी के बारे में पता चलने के बाद गांव वालों ने कुमार का सामना किया। आलम ने बताया, “जब लोगों ने रिजल्ट चेक किया और उन्हें पता चला कि यह रैंक किसी और कैंडिडेट की है, तो उन्होंने उससे इस बारे में सफाई मांगी। इसके बाद, वह गांव छोड़कर चला गया और तब से उसे देखा नहीं गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।

महुली पुलिस स्टेशन के इंचार्ज रामप्रवेश भारती ने बताया कि पुलिस ने शुरू में स्थानीय स्तर पर चल रही जानकारियों के आधार पर उसे सम्मानित किया था। भारती ने कहा, “बाद में, जब रिजल्ट को लेकर सवाल उठे, तो हमने उससे अपने डॉक्यूमेंट्स लेकर पुलिस स्टेशन आने को कहा। इसके बाद, उसने जवाब देना बंद कर दिया और उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है।” उन्होंने आगे बताया कि पुलिस उसका बयान दर्ज करने के लिए उसे ढूंढने की कोशिश कर रही है।

रंजीत कुमार दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, मुखर्जी नगर UPSC कोचिंग के लिए एक मशहूर केंद्र है। वह होली से पहले गांव लौटा था। इस बात का खुलासा होने के बाद, कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर पहले पोस्ट की गई सम्मान समारोह की तस्वीरें कथित तौर पर डिलीट कर दी गईं।

PIB ने बताया किस आकांक्षा सिंह ने क्लियर किया UPSC

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रशासनिक सेवा 2025 के नतीजे 6 मार्च 2026 को जारी हुए थे। यूपीएससी रिजल्ट 2025 की 301वीं रैंक को लेकर विवाद हो गया, जब एक ही रैंक पर दो महिलाओं ने दावा किया। दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है। इस बीच पीआईबी ने क्लियर कर दिया है कि गाजीपुर की रहने वाली आकांक्षा सिंह का दावा सही है। पढ़ें पूरी खबर…