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बतौर सांसद देश का “इंडिया” नाम बदलवाना चाहते थे आदित्य नाथ, और क्या थी उनकी ख्वाहिश, जानिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद आदित्यनाथ ने जुलाई 2014 में पहला बिल यूनिफॉर्म सिविल कोड और गौहत्या को बैन करने के लिए पेश किया गया था।

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यूपी के नए सीएम योगी आदित्यनाथ इंडिया का नाम बदलवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने लोकसभा में निजी विधेयक भी पेश किया था। सांसद रहते हुए योगी ने अपने पिछले दो कार्यकाल में लोकसभा में पांच बिल पेश किए, जिनमें से एक में संविधान में देश का नाम ‘इंडिया’ से बदलकर ‘हिंदुस्तान’ करने की मांग की गई थी। वहीं, दूसरा बिल समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर था। योगी के तीसरे बिल में देश भर में गौहत्या पर बैन लगाने की मांग की गई थी। वहीं, चौथा बिल जबरन धर्मांतरण पर बैन और पांचवां बिल उनके संसदीय क्षेत्र (गोरखपुर) में इलाहाबाद हाई कोर्ट की स्थायी बेंच बनाने पर केंद्रित था। सदन में अंतिम दो विधेयक अभी पेश किए जाने हैं। योगी का कोई भी विधेयक अभी तक पास नहीं हो सका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद आदित्यनाथ ने जुलाई 2014 में पहला बिल यूनिफॉर्म सिविल कोड और गौहत्या को बैन करने के लिए पेश किया गया था। समान नागरिक संहिता के लिए उनका विधेयक संविधान के अनुच्छेद 44 को हटाने की मांग करता है। संविधान के अनुच्छेद 44 में प्रावधान है कि राज्य सम्पूर्ण देश में ‘समान नागरिक संहिता’ लागू करने का प्रयास करेगा अर्थात् सभी के लिए निजी कानून एक जैसे होंगे। निजी कानूनों से अभिप्राय उन कानूनों से है, जो निजी मामलों में लागू होते हैं। जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि। इस मुद्दे को उठाते हुए योगी ने पिछले साल नवंबर में सदन में फिर से यह मुद्दा उठाया था।

मार्च 2015 में योगी आदित्यनाथ ने संविधान में देश के नाम को ‘इंडिया’ से बदलकर हिंदुस्तान करने की मांग की थी। विधेयक के मुताबिक संविधान के आर्टिकल 1 में ‘इंडिया’ लिखा है जो कि ‘भारत’ है, इसे ‘हिंदुस्तान’ से बदल देना चाहिए। आदित्यनाथ ने दावा किया था कि यह (इंडिया) गुलामी के प्रतीक को दर्शाता है और इस प्रकार हमारे संविधान से इसे हटाया जा सकता है। गोरखपुर से लगातार 5 बार से सांसद बन रहे योगी आदित्यनाथ ने संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी का समावेश, गोरखपुर में एम्स बनाने की मांग, आमी नदी नें प्रदूषण, इन्सेफ्लाइटिस जैसे कई मुद्दे उठा चुके हैं। वह कई बार पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग दोहराते रहे हैं।

सांप्रदायिक हिंसा रोकने के प्रभावी तंत्र पर चर्चा के दौरान योगी आदित्यनाथ ने साल 2014 में कब्रिस्तान पर खर्च का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि यूपी में कब्रिस्तान की दीवारें बनाने के लिए 300 करोड़ रुपए की राशि निश्चित की गई है। इस भाषण में उन्होंने सच्चर कमेटी को सांप्रदायिक आधार पर समाज को विभाजित करने का प्रयास बताया था। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 से 11 सत्रों में योगी की उपस्थिती 77 प्रतिशत रही है। दो सत्रों में 100 प्रतिशत उपस्थिति रही हैं। पीएम मोदी के सत्ता संभालने के बाद से योगी हर बड़ी चर्चा का हिस्सा बनते आए हैं।

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