ट्रांसजेंडर व्यक्ति (संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है। लेकिन नेशनल काउंसिल फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स (NCTP) के सदस्यों का दावा है कि सरकार ने उनसे बिना सलाह लिए इस बिल को पेश किया और फिर पारित भी करवा दिया।
इसी साल 20 मार्च को रात करीब 10:30 बजे ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट कल्कि सुब्रमण्यम को सामाजिक न्याय मंत्रालय से एक कॉल आया था। यह कॉल तब किया गया, जब ट्रांसजेंडर पर्सन्स (संशोधन) विधेयक 2026 संसद में पहले ही पेश हो चुका था। NCTP के सदस्यों का कहना है कि सरकार बिल तो लेकर आई, लेकिन उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। इसी वजह से उन्होंने मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा। इसके बाद उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया गया।
21 मार्च को दिल्ली में इन सदस्यों की मीटिंग रखी गई। लेकिन समय बहुत कम दिया गया, ऐसे में सिर्फ चार सदस्य ही मौके पर पहुंच सके। दो घंटे इंतजार के बाद उन्हें बताया गया कि मंत्री वीरेंद्र कुमार खुद नहीं आ पाएंगे क्योंकि वह बीमार हैं। इसके बाद एक सीनियर इकोनॉमिक एडवाइजर ने सदस्यों की बातें सुनीं। लेकिन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनके लगभग सभी सुझावों को सिरे से खारिज कर दिया गया।
क्यों हो रहा बिल का विरोध?
जानकारी के लिए बता दें कि इस बिल का विरोध करने का सबसे बड़ा कारण यह है कि एक्टिविस्ट सेल्फ-आइडेंटिफिकेशन का अधिकार चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान खुद तय करने का पूरा अधिकार मिले। उन्होंने इस बात का भी विरोध किया है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा पहचान तय की जाए। वहीं, शरीर के आधार पर किसी को ट्रांसजेंडर मानने पर भी एक्टिविस्ट सहमत नहीं हैं।
NCTP के सदस्यों के मुताबिक, जब मीटिंग के दौरान मंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई, तो वे उनके निवास स्थान पर भी पहुंचे। लेकिन वहां भी कई घंटों के इंतजार के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। उन्हें यही बताया गया कि मंत्री की तबीयत ठीक नहीं है और वह आराम कर रहे हैं। इसके बाद 23 मार्च को कल्कि सुब्रमण्यम ने मंत्री के निजी सहायक (PA) को अपनी आपत्तियां विस्तार से भेजीं। लेकिन 24 मार्च को बिल लोकसभा से पास हो गया और 25 मार्च को विपक्ष के विरोध के बीच राज्यसभा में भी इसे पारित कर दिया गया।
मंत्री वीरेंद्र कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून ट्रांसजेंडर लोगों को न सिर्फ सुरक्षा देगा, बल्कि उनके लिए कानूनी अधिकार भी सुनिश्चित करेगा। इससे उनका सम्मान और गरिमा भी सुनिश्चित होगी।
NCTP का क्यों हुआ गठन?
अगर NCTP की बात करें, तो यह काउंसिल 2020 में बनाई गई थी। ट्रांसजेंडर से जुड़े कानून और नीतियों के लिए सरकार इससे सलाह लेती है। सरकार की योजनाओं में NCTP की भूमिका अहम मानी जाती है। लेकिन अब जब ट्रांसजेंडर से जुड़ा यह बड़ा कानून लाया गया, तो NCTP के सदस्य नाराज हो गए। इसी वजह से कल्कि सुब्रमण्यम और रितुपर्णा नियोग ने 25 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि सरकार ने बिना पूछे यह कानून बना दिया और उनकी तमाम राय को नजरअंदाज कर दिया।
