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कोरोना मरीज के कारण अस्पताल में हंगामा, संक्रमण फैलने का डर

नर्सो ने कहा कि हालांकि हममें कोई लक्षण तो नही है फिर भी हम घर नही जा सकते क्योंकि हमारे घर में बुजुर्ग हैं और वे बीमार भी हैं। इस बारे में अस्पताल की अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक से बात की तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

अस्पताल में डॉक्टरों में बेचैनी।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना मरीज को लेकर बवाल हो गया। डॉक्टर, नर्स, मरीज सभी डरे हुए हैं और इस दौरान उन्होंने खूब हंगामा किया गया। काम बंद करने की धमकी भी दी गई, लेकिन चिकित्सा अधिकारियों ने सभी को समझाकर शांत कराया। दरअसल, जिस मरीज को लेकर बड़ी संख्या में डॉक्टरों व कर्मचारियों को क्वारंटाइन करना पड़ा है उस मरीज की वजह से कितनों को संक्रमण हुआ होगा यह कोई नहीं जानता।

उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक मामला इस तरह है कि यह मरीज शनिवार को अस्पताल आया था। इसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्क्रिनिंग ओपीडी में दिखाने के बाद इस मरीज को वार्ड नंबर पांच में भेज दिया गया। जहां से नमूने लेने के बाद इस मरीज को ज्यादा तकलीफ होने की वजह से इमरजेंसी वार्ड जाने को कहा गया। इमरजेंसी वार्ड से इसे साधारण दमे का मरीज समझ कर डॉक्टरों ने इस दमे या सांस की दूसरी बीमारियों के लिए बने सारी वार्ड में भेज दिया गया। यहां पर जो डॉक्टर देखने आए उन्होंने इसे रविवार को इसे सामान्य मरीज जान 11 नंबर जनरल वार्ड भेज दिया।

इस बीच इस मरीज के जो नमूने लिए गए वह नमूने जांच के लिए बनी प्रयोगशाला में गए। यह ही नहीं इस मरीज को एक्सरे के लिए भी ले जाया गया था जहां आने जाने के बीच भी काफी लोग इसके संपर्क में आए होंगे। जानकारों का कहना है कि इनमें ट्राली वाला कर्मचारी, लिफ्टकर्मी, एक्सरे वाला तकनीशियन व लैब के लोग भी शामिल हो सकते हैं। बाद में जब वार्ड नंबर पांच से भेजे गए नमूने की जांच की गई तो पाया गया कि यह मरीज तो कोरोना का पुष्ट मरीज है।

इसके बाद बात जंगल में आग की तरह फैल गई। इस मामले के आने के बाद गाज निचले डॉक्टरों पर गिर सकती है। इस बात को लेकर रेजींडेंट डाक्टरों व नर्सों में खासी नाराजगी है। उन्होंने सोमवार को जमकर हंगामा किया। रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि सारा दारोमदार निचले डॉक्टरों व कर्मचारियों पर ही रहता है। यहां तक कि वरिष्ठ चिकित्सक मरीज को देखते तक नहीं। इस बड़ी चूक के लिए भी निचलों को ही निशाना बनाया जाएगा।

इसलिए विरोध में डॉक्टरों ने काम करने से मना कर दिया। हालांकि बाद में अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समाझा बुझाकर काम पर वापस बुला लिया और जो सीधे संपर्क में आए थे, उन नर्स व डॉक्टरों को आइसोलेशन में भेज दिया। बावजूद इसके कई कर्मचारी डरे हुए हैं। नर्सो ने कहा कि हालांकि हममें कोई लक्षण तो नही है फिर भी हम घर नही जा सकते क्योंकि हमारे घर में बुजुर्ग हैं और वे बीमार भी हैं। इस बारे में अस्पताल की अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक से बात की तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

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