उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी का सीधा असर अब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) की सेवाओं और उसकी कमाई पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली से सटे हाइटेक शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रोडवेज के पास एक भी एसी बस न होने का खामियाजा विभाग को भुगतना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोग रोडवेज की सामान्य बसों में सफर करने से कतरा रहे हैं और विकल्प के तौर पर निजी एसी बसों को चुन रहे हैं।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा दोनों डिपो को मिलाकर इस समय कुल 300 से भी अधिक बसें संचालित हो रही हैं। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि ये सभी बसें पर्यावरण के अनुकूल सीएनजी से चलती हैं, लेकिन ये सभी सामान्य बसें हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में इन सामान्य बसों के भीतर का तापमान यात्रियों के लिए असहनीय हो जाता है। यही वजह है कि पिछले 15 दिनों के भीतर रोडवेज की बसों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़े क्या बताते हैं?

आंकड़ों की बात करें तो सामान्य दिनों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा दोनों डिपो की बसों से रोजाना लगभग 45 हजार लोग अपनी मंजिलों तक पहुंचते थे। लेकिन मौजूदा समय में यात्रियों का यह आंकड़ा घटकर महज 35 हजार के करीब रह गया है। प्रतिदिन यात्रियों की संख्या में हुई इस 10 हजार की कमी के कारण रोडवेज को कई फीसद का घाटा उठाना पड़ रहा है, जिससे विभाग की आय पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ा है।

स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि नोएडा को एक हाईटेक और आधुनिक शहर के रूप में जाना जाता है, इसके बावजूद यहां के सरकारी डिपो में एक भी एसी बस का न होना बेहद दुखदायी और हैरान करने वाला है। रोडवेज की इस लचर व्यवस्था के कारण आम जनता को मजबूरन निजी बसों या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी बस संचालक इस स्थिति का पूरा फायदा उठा रहे हैं और लोग भी भीषण गर्मी से बचने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करके निजी एसी बसों में सफर करने को मजबूर हैं।