यूपीः गाजीपुर पहुंचे राकेश टिकैत ने बैरिकेडिंग पर लिखा पीएम मोदी का नाम, कहा- सरकार ने ही रोका है रास्ता

टिकैत ने कहा कि सरकार झूठ बोल रही है। देश के पीएम झूठ बोल रहे हैं। देश के विकास का रास्ता सरकार ने रोक रखा है। सारे रास्ते सरकार ही रोक रही है। ये बैरिकेडिंग भी तो सरकार के ही हैं।

Rakesh Tikait
टिकैत ने कहा कि हम ये बताना चाहते हैं कि ये रास्ता हमारी तरफ से बंद नहीं है। (फाइल फोटो)

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यूपी गेट पर लगी बैरिकेडिंग के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यूपी गेट पर लगी बैरिकेड्स पर हरे रंग से मोदी सरकार लिखकर ये संदेश देना चाहा कि ये रास्ता मोदी सरकार ने ही रोका है।

इस मामले से जुड़ा वीडियो न्यूज चैनल आज तक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। जिसमें आज तक के रिपोर्टर ने टिकैत से पूछा कि वो बैरिकेडिंग पर मोदी सरकार क्यों लिख रहे हैं तो टिकैत ने कहा कि हम ये बताना चाहते हैं कि ये रास्ता हमारी तरफ से बंद नहीं है।

टिकैत ने कहा कि सरकार झूठ बोल रही है। देश के पीएम झूठ बोल रहे हैं। देश के विकास का रास्ता सरकार ने रोक रखा है। सारे रास्ते सरकार ही रोक रही है। ये बैरिकेडिंग भी तो सरकार के ही हैं।

दिल्ली जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा जब कहेगा, तब दिल्ली जाएंगे।

बता दें कि यूपी गेट पर गुरुवार को उस समय हंगामा बढ़ गया था, जब ये खबरें वायरल हो रही थीं कि किसान अपने टेंट उखाड़ रहे हैं। हालांकि बाद में भाकियू ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा ये अफवाहें हैं, किसानों का आंदोलन जारी है, खत्म नहीं हुआ है। इसलिए इन अफवाहों पर ध्यान न दें।

कौन हैं राकेश टिकैत

अपने स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसानों के बड़े नेता रहे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र हैं।

उनके बड़े भाई नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन(अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। राकेश टिकैत लंबे समय से पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसानों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

इससे पहले किसानों के हित में वो गन्ना मिलों के खिलाफ भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। किसानों की लड़ाई लड़ने वाले राकेश टिकैत अब तक 40 से अधिक बार जेल भी जा चुके हैं।

1985 में किसान नेता राकेश टिकैत का चयन दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था लेकिन सरकारी दबाव के कारण राकेश टिकैत ने 1993 में पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राकेश टिकैत भाकियू से जुड़ गए, भारतीय किसान यूनियन के ज्यादातर व्यवहारिक फैसले राकेश टिकैत ही लेते हैं।

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