UP Rajya Sabha Polls: राज्यसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी एक कड़े मुकाबले के लिए तैयार हैं। 10 सीटों में से बीजेपी और सपा के पास क्रमशः सात और दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। हालांकि, बची हुई एक सीट पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, क्योंकि सपा पहले ही दो उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और तीसरे को मैदान में उतारने की योजना बना रही है।

चुनावों का समय इस बात को और भी दिलचस्प बना देता है कि ये चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हो रहे हैं। क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं को देखते हुए बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी अपने विधायकों पर कड़ी नजर रख रही है। नेता ने कहा, “अगर क्रॉस-वोटिंग के कारण बीजेपी सपा के तीसरे उम्मीदवार से हार जाती है, तो विधानसभा चुनाव से पहले जनता को गलत संदेश जाएगा।”

सपा के पास 101 विधायक

उत्तर प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में 403 सदस्यीय सदन में 396 सदस्य हैं, क्योंकि पिछले 11 महीनों में सात विधायकों का निधन हो गया है। इसलिए, राज्यसभा के प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। सपा के पास 101 विधायक हैं। हालांकि, इसकी प्रभावी संख्या 100 है क्योंकि चैल की विधायक पूजा पाल, जिनका नाम विधानसभा रिकॉर्ड में सपा सदस्य के रूप में दर्ज है, बीजेपी में शामिल हो गई हैं और वर्तमान में पार्टी की राज्य उपाध्यक्ष हैं।

पाल को पिछले साल 14 अगस्त को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस टिप्पणी की तारीफ करने के बाद कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सपा से निष्कासित कर दिया गया था कि अतीक अहमद जैसे माफिया मिट्टी में मिल गए हैं। दो कांग्रेस विधायकों के समर्थन से, सपा के पास 102 वोट हैं, जो उसके तीसरे उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता वोटों से नौ कम हैं।

फूलपुर पवई के विधायक रमाकांत यादव की उपलब्धता भी अनिश्चित है। एक वरिष्ठ सपा नेता ने कहा, “हमें रमाकांत यादव के बारे में संदेह है क्योंकि वह फिलहाल जेल में हैं। हमें यकीन नहीं है कि वह अपना वोट डाल पाएंगे।” समाजवादी पार्टी ने बुधवार को सबको चौंकाते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी अधिकारी धनराज नथवानी को पांच बार के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव के साथ उम्मीदवार के रूप में घोषित किया।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा, “मतगणना पूरी हो जाएगी। यह गिनती का मामला है। इस प्रक्रिया (तीसरे उम्मीदवार का चयन) में धैर्य की आवश्यकता है। हमारे कई लोग वापस आना चाहते हैं क्योंकि वे वहां (एनडीए में) खुश नहीं हैं।”

अखिलेश की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि पार्टी बीजेपी के एनडीए सहयोगी दलों के मुस्लिम विधायकों के साथ-साथ निराश बीजेपी विधायकों के समर्थन पर भरोसा कर रही है कि वे उसके पक्ष में मतदान करेंगे। एक वरिष्ठ सपा नेता ने कहा, “जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक दल के दोनों मुस्लिम विधायक 2022 में सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़कर चुने गए थे। हमें उम्मीद है कि वे हमारे पक्ष में क्रॉस वोट करेंगे। हमें अब्बास अंसारी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के तीन अन्य विधायकों से भी यही उम्मीद है।”

मुख्तार अंसारी के बेटे अंसारी ने 2022 में मऊ सदर सीट तब जीती थी जब एसबीएसपी ने एसपी के साथ गठबंधन किया था। सपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, “अगर क्रॉस-वोटिंग होती है, तो सपा का तीसरा उम्मीदवार जीत जाएगा।”

क्या है बीजेपी का गणित?

भारतीय जनता पार्टी के पास 255 विधायक हैं और उसके एनडीए सहयोगी दलों के पास 33 और विधायक हैं, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, एसबीएसपी के 6 और निषाद पार्टी के 5। इससे बीजेपी की कुल सीटों की संख्या 288 हो जाती है।

पूजा पाल के समर्थन से, निर्दलीय विधायक मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह, जिन्हें जून 2025 में राज्यसभा चुनाव 2024 में क्रॉस-वोटिंग के लिए सपा से निष्कासित कर दिया गया था और राजा भैया के नेतृत्व वाले जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों के समर्थन से, एनडीए की प्रभावी संख्या 294 तक पहुंच जाती है, जो आठ उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक 296 (प्रत्येक के लिए 37) प्रथम वरीयता वोटों से दो कम है। जिन 10 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से बीजेपी के पास वर्तमान में आठ सीटें हैं।

बीजेपी खेमे की ओर से एसबीएसपी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की संभावना से इनकार न किए जाने के बाद एक बीजेपी नेता ने कहा, “इससे एनडीए की ताकत घटकर 292 हो सकती है।” हालांकि, बीजेपी राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य पर दांव लगा रही है, जिन्होंने 2024 में भी क्रॉस वोटिंग की थी, लेकिन अभी भी विधानसभा रिकॉर्ड में सपा विधायकों के रूप में सूचीबद्ध हैं क्योंकि अखिलेश ने उन्हें अच्छे आचरण का हवाला देते हुए निष्कासित नहीं किया था।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “हमें उम्मीद है कि राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य अपने अंतर्मन की आवाज सुनकर एनडीए उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे, जैसा कि उन्होंने पिछले राज्यसभा चुनावों में किया था। अगर वे हमारा समर्थन करते हैं, तो एनडीए की ताकत 295 हो जाएगी और आठवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए हमें केवल एक और वोट की जरूरत होगी।” चतुर्वेदी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देंगे।

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समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के मुताबिक प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी बुधवार सुबह 11 बजे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नामांकन के दौरान सपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी मौजूद रहेंगे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…