Saharanpur News: राजपूतों के वर्चस्व वाली देवबंद विधानसभा में बीजेपी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नई मुसीबत खड़ी हो सकती है। यहां के सबसे बड़े गांंव रणखंडी में रहने वाले बीजेपी के नेता ठाकुर अनिल सिंह ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी पेश कर दी है।
अनिल सिंह ने मंगलवार को अपने ‘जनसमस्या कार्यालय’ का उद्घाटन किया। उनके इस कार्यक्रम में सहारनपुर के पूर्व लोकसभा सांसद राघव लखनपाल शर्मा भी शामिल हुए। पिछली दो बार से देवबंद विधानसभा में प्रतिनिधित्व बृजेश सिंह रावत कर रहे हैं। वह योगी सरकार में लोक निर्माण राज्यमंत्री भी हैं।
योगी के सहारनपुर दौरे से एक दिन पहले टिकट की दावेदारी
यूं तो किसी भी चुनाव में किसी भी सियासी दल के लिए एक टिकट के लिए कई दावेदार होते हैं लेकिन अनिल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से एक दिन पहले टिकट की दावेदारी पेश की है। योगी आदित्यनाथ ने कुछ ही दिनों पहले बृजेश सिंह के गांव के पास जनसभा को संबोधित किया था।
मंगलवार को अनिल सिंह द्वारा आयोजित कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह राज्यमंत्री बृजेश रावत के खिलाफ कार्यकर्ताओं के बीच पनपे असंतोष और नाराजगी की अभिव्यक्ति ज्यादा था।

इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे सहारनपुर के पूर्व भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि इस क्षेत्र के लोगों की मंशा मां बाला सुंदरी जरूर पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वह बतौर भाजपा प्रत्याशी इस क्षेत्र के बड़े गांव रणखंड़ी, भायला, मीरगपुर, जखवाला आदि में जनसंपर्क को नहीं जा पाए थे।
उन्होंने बृजेश रावत का नाम लिए बगैर कहा कि इन बड़े गांवों में उनको ले जाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई और वह चुनाव नहीं जीत पाए। राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों में अहंकार और मनमानी कार्यप्रणाली नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति यह ऐलान करता घूमता है कि वह इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अगले 35 सालों तक करेगा। लोकतंत्र में चुनाव क्षेत्र उनकी पारिवारिक या निजी रियासत जैसे नहीं होते हैं।
सहारनपुर के कई बड़े नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी भी बनाई
राघव लखनपाल शर्मा जहां खुलकर अनिल सिंह के पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कई सीनियर नेताओं ने उनके कार्यक्रम से दूरी बनाई। इन नेताओं में नगर अध्यक्ष अरूण गुप्ता, पालिका अध्यक्ष विपिन गर्ग शामिल थे। इनके अलावा राज्य मंत्री जसवंत सैनी, जिला अध्यक्ष ठाकुर अजित सिंह राणा भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे जबकि अनिल सिंह ने इनकी तस्वीरें बैनर पर लगवाई थीं।
कहने के लिए अनिल सिंह ने ‘जनसमस्या कार्यालय’ का उद्घाटन किया लेकिन कार्यक्रम में उन्होंने खुलकर बीजेपी के टिकट की दावेदारी की। खुद के अनुशासित होने का दावा करने वाली बीजेपी में पहली बार सार्वजनिक रूप से इस तरह की अभिव्यक्ति और प्रदर्शन सामने आया है, जो पार्टी के मिशन-2027 के लिए शुभ संकेत नहीं हो सकते।
अभी हाल ही में मेरठ के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर की नियुक्ति हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह इस तरह के आयोजनों को किस तरह से लेते हैं। जिला अध्यक्ष ठाकुर अजित सिंह राणा इस मामले पर प्रतिक्रिया देने को सामने नहीं आए।
क्यों बीजेपी के लिए चिंता का विषय?
देवबंद में अनिल सिंह का यह आयोजन न सिर्फ पार्टी में गुटबाजी बल्कि वर्तमान विधायक के प्रति एंटी इनकंबेंसी की तरफ भी इशारा करता है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी पार्टी को ऐसी ही नाराजगी और फिर भीतरघात के चलते सहारनपुर लोकसभा में हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके अलावा बीजेपी इस मंडल की दो अन्य सीटें कैराना और मुजफ्फरनगर भी हार गई थी। ऐसे में अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व ऐसी गतिविधियों से कैसे निपटेगा।
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