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यूपी: सिपाही का फॉर्म भरने वालों को दो टूक- रिजेक्ट होने पर नहीं लगा सकते RTI

आरटीआई एक्टिविस्ट का कहना है कि यह नोटिफिकेशन पूरी तरह से गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस अथॉरिटी खुद को केन्द्रीय एक्ट से साफ बचा रही है।

यूपी पुलिस। (image source-Facebook)

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अधिसूचना जारी कर कहा है कि यूपी पुलिस में भर्ती से संबंधित कोई भी जानकारी आरटीआई के तहत नहीं दी जाएगी। हालांकि यूपी पुलिस की इस अधिसूचना को आरटीआई एक्ट का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। बता दें कि यह नोटिफिकेशन पुलिस कॉन्सटेबल और प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्सटेबलरी के परिणाम घोषित करते समय 18 मई को जारी किया गया था। इस नोटिफिकेशन में कहा गया था कि आरटीआई, 2005 के तहत परिणाम से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं दी जाएगी।

बता दें कि इन भर्तियों के लिए 15 लाख से ज्यादा अभ्यार्थियों ने आवेदन किया था, जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट और प्रमोशन बोर्ड ने साल 2015 में 28,915 वैकेंसी निकाली थी। वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस के इस नोटिफिकेशन पर आरटीआई एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने कहा है कि यह नोटिफिकेशन पूरी तरह से गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस अथॉरिटी खुद को केन्द्रीय एक्ट से साफ बचा रही है। नोटिफिकेशन में जो रिलेटिड इन्फॉर्मेशन शब्द का इस्तेमाल किया गया है, उसके आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस बेसिक जानकारी देने से भी इंकार कर सकती है।

एक अन्य आरटीआई एक्टिविस्ट रविकांत के अनुसार, इस तरह के प्रोविजन आम तौर पर किसी कैंडिडेट को ब्लॉक करने के उद्देश्य से इस्तेमाल किए जा सकते हैं और वह कैंडिडेट इस पर कोई सवाल भी नहीं कर सकेगा। रविकांत के अनुसार, यह नोटिफिकेशन पूरी तरह से असंवैधानिक है। उनके अनुसार, यह नोटिफिकेशन 15 लाख कैंडिडेट्स के सूचना के अधिकार का एक झटके में उल्लंघन कर सकता है। बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि सिविल सर्विस प्रीलिम्स एग्जामिनेशन के अंक आरटीआई के तहत नहीं बताए जाएंगे। इसके अलावा किसी अन्य सरकारी निकाय को आरटीआई के तहत छूट नहीं दी गई है। यही वजह है कि यूपी पुलिस के नोटिफिकेशन की लोग आलोचना कर रहे हैं।

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