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अब कृष्ण जन्मभूमि का केस पहुंचा कोर्ट, शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की उठी मांग

शुक्रवार को श्री कृष्ण विराजमान ने मथुरा के कोर्ट में सिविल मुकदमा दायर कर दिया, जिसमें 13.37 एकड़ जमीन (कृष्ण जन्म भूमि) का स्वामित्व मांगा गया है।

Sri Krishna Virajmaan, Court, Civil Suit, Ram Lala Virajmaan, Mathuraभगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः रवि कनौजिया)

अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि के विवाद के बाद अब कृष्ण जन्मभूमि का मामला भी कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार को श्री कृष्ण विराजमान ने मथुरा के कोर्ट में सिविल मुकदमा दायर कर दिया, जिसमें 13.37 एकड़ जमीन (कृष्ण जन्म भूमि) का स्वामित्व मांगा गया है। साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग भी उठाई गई है। आरोप है कि इस मस्जिद ईदगाह को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनाया गया है।

दायर याचिका ‘भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ के नाम से दी गई है, जिसमें उनकी अंतरंग सखी के तौर पर अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह भक्त हैं। याचिका के मुताबिक, जहां पर शाही मस्जिद और ईदगाह हैं, वही असल कारागार है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इतिहास को लेकर कहा जाता है कि जहां पर मौजूदा वक्त में भगवान कृष्ण का जन्मस्थान हगै, वहां लगभग पांच हजार साल पहले मल्लपुरा क्षेत्र के कटरा केशव देव में राजा कंस की जेल थी। इसी में रोहिणी नक्षण में मध्य रात्रि को भगवान का जन्म हुआ था।

कटरा केशवदेव को ही इतिहासकार डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल कृष्णभूमि मानते हैं। कई अध्ययनों और सबूतों के आधार पर मथुरा के राजनीतिक संग्रहाल से जुड़े कृष्णदत्त वाजपेयी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि यही भगवान की असल जन्मस्थली है।

बताया जाता है कि साल 1968 में श्री कृष्णभूमि ट्रस्ट और शाही ईदगाह कमेटी में एक समझौता हुआ था। इसके तहत जमीन ट्रस्ट के पास रहने की बात हुई थी, जबकि मस्जिद के प्रबंधन अधिकार मुस्लिम कमेटी के दिए जाने के लिए कहा गया था। दरअसल, शाही ईदगाह मस्जिद कृष्णभूमि से बिल्कुल सटी है। जानकारों की मानें तो औरंगजेब ने केशवनाथ मंदिर ध्वस्त कर मस्जिद बनवाई थी। 1935 में इलाहाबाद HC ने काशी के हिंदू राजा को जमीन (जहां मस्जिद थी) के कानूनी अधिकार सौंपे थे।

फिर 1951 में श्री कृष्णजन्मभूमि ट्रस्ट बना। तय हुआ कि वहां पुनः मंदिर बनेगा और यही ट्रस्ट उसका प्रबंधन संभालेगा। सात साल बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ संस्था गठित की गई। जमीन पर स्वामित्व न होने के बाद भी इस संस्था ने ट्रस्ट के लिए सारी भूमिकाएं निभाईं। आगे चलकर सिविल केस भी दायर किया, पर 1968 में मुस्लिम पक्ष संग समझौता कर लिया था।

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