UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार शाम को एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया। इसमें विधायक आराधना मिश्रा मोना को राज्य इकाई का प्रमुख और सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी मिश्रा ने अजय राय की जगह ली है। राय 2023 से यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष है। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी नियुक्त किया है।

इन नियुक्तियों के साथ, कांग्रेस ने सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। इसमें एक ब्राह्मण को राज्य इकाई का अध्यक्ष, एक मुस्लिम को कार्यकारी अध्यक्ष, एक ओबीसी (देविंदर निषाद) और एक दलित (आलोक प्रसाद) को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह इंडिया ब्लॉक की सहयोगी समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्याक) नारे के अनुरूप है।

अजय राय ने क्या कहा?

अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “राहुल गांधी जी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का मैं जीवन भर आभारी रहूंगा कि उन्होंने मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष का पद सौंपा। संघर्ष अभी जारी है। नए अध्यक्ष समेत सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे।”

कांग्रेस की ओर से प्रतापगढ़ के रामपुर खास से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा को चुनावी साल में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए चुनना, केवल उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत है। उनकी नियुक्ति न केवल इसलिए महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस ने अपनी राज्य इकाई का नेतृत्व करने के लिए एक महिला को चुना है, बल्कि इसलिए भी कि यह लगभग 15 सालों के बाद पार्टी में एक ब्राह्मण महिला चेहरे की वापसी का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अंतिम महिला प्रमुख रीता बहुगुणा जोशी थीं, जिन्होंने 2007 से 2012 तक पीसीसी अध्यक्ष के रूप में काम किया। वह अब बीजेपी में हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवारों में से एक से संबंध रखने के बावजूद, मिश्रा की राजनीतिक यात्रा जमीनी स्तर से शुरू हुई। एमबीए की डिग्री प्राप्त मिश्रा ने ब्लॉक स्तर की चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और 2014 में राज्य विधानसभा में जाने से पहले ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया।

वह पहली बार 2014 में रामपुर खास से विधायक चुनी गईं, 2017 में उन्होंने यह सीट बरकरार रखी और 2022 में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की। ​​उनकी तीन जीत ने उन्हें अपने पिता की राजनीतिक विरासत से परे अपना एक चुनावी आधार प्रदान किया है।

मिश्रा प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश चुनाव अभियान में भी एक जाना-पहचाना चेहरा रही हैं। उन्होंने गांधी के साथ राज्य के दौरों के दौरान उत्तर प्रदेश में व्यापक यात्रा की और 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में सक्रिय रूप से शामिल थीं।

कांग्रेस नेता उन्हें सामाजिक और ग्रामीण विकास से लंबे समय से जुड़ी एक जमीनी कार्यकर्ता बताते हैं। उनके प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने सहकारी क्षेत्र, ग्रामीण विकास और महिला स्वयं सहायता समूहों में काम किया है और दो दशकों से अधिक समय से सामाजिक कार्य से जुड़ी हुई हैं।

इमरान मसूद की वापसी

सहारनपुर के सांसद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से पार्टी के नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख चेहरा जुड़ गया है। मसूद 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जिनकी उस समय आलोचना हुई थी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।

इसके बाद वे चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे और सपा के साथ संक्षिप्त कार्यकाल के बाद कांग्रेस में लौट आए और 2024 में सहारनपुर से लोकसभा चुनाव जीता। उनकी नियुक्ति को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों का समर्थन हासिल करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

कांग्रेस के अंदर कई लोग मिश्रा और मसूद की नियुक्ति को पार्टी में ब्राह्मण और मुस्लिम के एक नए सामाजिक संयोजन के उदय के रूप में देखते हैं। मसूद की पदोन्नति का असर समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन को लेकर कांग्रेस की चल रही बातचीत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि सहारनपुर के सांसद मसूद हाल ही में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ तीखी बयानबाजी कर रहे हैं।

जहां एक ओर मसूद इस बारे में मुखर रहे हैं कि दोनों पार्टियों को कब और कैसे मिलकर काम करना चाहिए, वहीं दूसरी ओर मिश्रा और तिवारी परिवार के सपा नेतृत्व के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध माने जाते हैं। नतीजतन, कांग्रेस के कुछ नेता इस नई व्यवस्था को दो मोर्चों पर फायदेमंद मानते हैं, एक तो पार्टी की सामाजिक पहुंच को बढ़ाना और साथ ही ऐसे नेताओं को तैयार करना जो 2027 के चुनावों के लिए सीट-शेयरिंग पर बातचीत करने के लिए सपा नेतृत्व से जुड़ सकें।

पीडीए तक पहुंचने की कोशिश

राज्य में कांग्रेस के एआईसीसी इंचार्ज दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम हैं। इसके अलावा, शुक्रवार को कांग्रेस नेतृत्व ने निषाद समुदाय से आने वाले एक दलित और एक ओबीसी नेता को वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। जहां देवेंद्र निषाद पार्टी की मछुआरा इकाई के अध्यक्ष हैं, वहीं आलोक प्रसाद पहले पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके है और गोरखपुर से आते हैं।

गठबंधन सहयोगी समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्याक) नारे को दोहराते हुए कांग्रेस के नए राज्य नेतृत्व के लिए चुनौती यह है कि वह इस सामाजिक प्रतिनिधित्व को जमीनी स्तर पर संगठनात्मक विस्तार में परिवर्तित करे।

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से करीब 6 महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने बड़े संगठनात्मक फेरबदल किए हैं। इसमें सबसे अहम बदलाव जो हुआ है वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद है। यूपी कांग्रेस की जिम्मेदारी आराधना मिश्रा (मोना तिवारी) को दी गई है जो तीन बार की विधायक हैं और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…