साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का खराब प्रदर्शन रहा था। इसके मद्देनजर पार्टी के कई नेताओं ने राज्य प्रशासन की उपेक्षा के कारण बीजेपी कार्यकर्ताओं में फैली निराशा को एक कारक बताया था। वहीं, कुछ अन्य ने इसके लिए उम्मीदवार चयन में केंद्रीय नेतृत्व के वर्चस्व को जिम्मेदार ठहराया।

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की उत्तर प्रदेश में सीटों की संख्या 80 में से 62 से घटकर 33 रह गई, जबकि उसका वोट शेयर 49.98% से घटकर 41.37% हो गया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में केंद्रीय पार्टी पदाधिकारियों की एक नई टीम का गठन किया है। इसमें उत्तर प्रदेश के नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो पिछले चुनाव हार चुके हैं।

उत्तर प्रदेश बीजेपी हलकों में इसे पार्टी हाई कमान के उन प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है, जिनका उद्देश्य 2027 की शुरुआत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की कार्ययोजना को सुचारू बनाने के लिए केंद्रीय और राज्य इकाइयों के बीच समन्वय और तालमेल को बेहतर बनाना है।

नितिन नवीन की टीम में यूपी से बीजेपी के आठ चेहरे

नवीन की नई टीम में यूपी से बीजेपी के आठ चेहरे हैं। यह पिछली टीम से एक ज्यादा हैं। इनमें उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव के समूहों में दो-दो प्रतिनिधि शामिल हैं, साथ ही दो मोर्चों ओबीसी और अल्पसंख्यक के अध्यक्ष भी हैं।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “इन आठ नेताओं में से चार को 2024 के लोकसभा और 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। उनका पदोन्नति होना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता के लिए चुनौती नहीं कहा जा सकता।” इसके बजाय, उन नेताओं को राज्य में संगठनात्मक कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

विधानसभा चुनाव जीतना लक्ष्य

आदित्यनाथ के करीबी बीजेपी नेता ने कहा, “योगी जी और बीजेपी नेतृत्व दोनों का अंतिम लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव जीतना और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए अनुकूल माहौल बनाना है।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद बरकरार रखने वाली रेखा वर्मा धौराहरा से लोकसभा चुनाव हार गईं, जबकि नई महासचिव स्मृति ईरानी 2024 में अमेठी संसदीय सीट से हार गईं। उन्होंने यह भी बताया कि एक अन्य महासचिव हरीश द्विवेदी 2024 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से हार गए, जबकि नए ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अमरपाल मौर्य को 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्चाहार से हार का सामना करना पड़ा।

सात पदाधिकारी 55 साल से कम उम्र के

उत्तर प्रदेश बीजेपी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने तारिक मंसूर को छोड़कर, राज्य के अन्य सात पदाधिकारी 55 साल से कम उम्र के हैं और उन्होंने कहा कि यह पार्टी की युवा नेताओं को बढ़ावा देने की योजना के अनुरूप है ताकि वह युवाओं और जेन-जी के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सके।

बीजेपी द्वारा स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय नेतृत्व में वापस लाने के फैसले पर एक पार्टी नेता ने कहा, “वह महिलाओं और युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, एक अच्छी वक्ता हैं और अतीत में राहुल गांधी को उनके गढ़ अमेठी में हराने का अनुभव रखती हैं। वह राहुल और कांग्रेस की एक अन्य शीर्ष नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनौती देने के लिए एक अच्छी नेता साबित हो सकती हैं, जिनके यूपी में पार्टी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने की संभावना है।”

हरीश द्विवेदी को नया राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए जाने पर बीजेपी के एक नेता ने कहा, “द्विवेदी ब्राह्मण हैं और एबीवीपी पृष्ठभूमि से जुड़े एक सक्रिय नेता हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ऐसी खबरें आ रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थगित किए गए नए यूजीसी नियमों को लेकर ऊंची जातियों के कुछ वर्गों में असंतोष पनप रहा है। पार्टी के भीतर यह सर्वविदित है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ द्विवेदी के संबंध कभी बहुत सौहार्दपूर्ण नहीं रहे, लेकिन एक युवा ब्राह्मण चेहरे के रूप में और असम बीजेपी प्रभारी के रूप में और आगामी राजस्थान स्थानीय निकाय चुनावों के वर्तमान प्रभारी के रूप में उनके अनुभव के कारण वे उत्तर प्रदेश चुनावों में पार्टी के लिए मददगार साबित होंगे।”

हरीश द्विवेदी बस्ती से दो बार रह चुके सांसद

द्विवेदी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर से सटे बस्ती से दो बार सांसद रह चुके थे, लेकिन 2024 के चुनाव में अपनी सीट से हार गए थे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, ओबीसी नेता रेखा वर्मा और पसमांदा मुस्लिम तारिक मंसूर यूपी बीजेपी या राज्य सरकार के मामलों में अहस्तक्षेप के लिए जाने जाते हैं।

पार्टी के एक नेता ने कहा, “पूर्व एएमयू कुलपति के रूप में मंसूर मुस्लिम समुदाय में एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्हें संगठन में बनाए रखकर और उत्तर प्रदेश के कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त करके पार्टी ने उन मुसलमानों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश की है जो बीजेपी शासित राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद मनमानी कार्रवाई से काफी नाराज हैं।” बासित अली अक्सर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं।

बुलंदशहर से तीन बार के दलित सांसद भोला सिंह और गोरखपुर के चौरी-चौरा से राज्यसभा सांसद और पूर्व विधायक संगीता यादव मूल रूप से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित नेताओं के रूप में जाने जाते हैं। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि संगीता यादव का पैतृक घर गोरखपुर में है, लेकिन वह नियमित रूप से इस क्षेत्र में नहीं आती हैं। एक नेता ने कहा, “लेकिन उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल करके पार्टी ने यादव समुदाय तक पहुंचने के प्रयासों को तेज कर दिया है, जो समाजवादी पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक है।”

सूत्रों के अनुसार, अमरपाल मौर्य सत्ता में बैठे लोगों के करीब आने की बजाय संगठनात्मक कामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। एक नेता ने कहा, “मौर्य पर ओबीसी, विशेषकर कुशवाहा, शाक्य, सैनी और मौर्य समूहों के बीच काम करने की बड़ी जिम्मेदारी है, जिनका उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार आदि में मजबूत प्रभाव है। लेकिन उनकी नियुक्ति उत्तर प्रदेश के लिए ज्यादा अहम है क्योंकि सपा अब इन गैर-यादव जाति समूहों को लुभाने की कोशिश कर रही है।”

बीजेपी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि इन नियुक्तियों के जरिये पार्टी नेतृत्व ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए उन आरोपों को खारिज करने की कोशिश की है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की दो इंजन वाली सरकार के इंजन आपस में टकरा रहे हैं।

तावड़े यूपी बीजेपी संगठन से अच्छी तरह से परिचित

चुनावों से पहले बीजेपी के महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश इकाई का नया प्रभारी नियुक्त किया जाना पार्टी संगठन और राज्य सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। तावड़े को बिहार चुनावों को संभालने का अनुभव है।

तावड़े यूपी बीजेपी संगठन से भी अच्छी तरह परिचित हैं, क्योंकि इस साल अप्रैल में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और कैबिनेट मंत्रियों सहित कई पार्टी और सरकारी पदाधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की थी। नवीन ने गुजरात के नए राष्ट्रीय सचिव जगदीश पटेल को उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी का सह-प्रभारी नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले पटेल दिसंबर 2023 में उत्तर प्रदेश के पूर्व सह-प्रभारी सुनील ओझा के निधन के बाद से वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र के कार्यालय का कार्यभार संभाल रहे हैं।

वाराणसी के एक बीजेपी नेता ने कहा, “2029 के लोकसभा चुनावों तक पटेल बीजेपी की ओर से काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।” उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने से उत्साहित हैं। उत्तर प्रदेश से आने वाले नए पदाधिकारियों पर उत्तर प्रदेश के प्रति अधिक जिम्मेदारी होगी और यह उनका लक्ष्य होगा कि बीजेपी अपने गृह राज्य में अच्छा प्रदर्शन करे। राष्ट्रीय नेता के रूप में अन्य राज्यों में काम करने का उनका अनुभव उत्तर प्रदेश चुनावों में उपयोगी साबित होगा। ये नियुक्तियां उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होंगी।”

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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का सोमवार को ऐलान कर दिया गया है। बीएल संतोष को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाया गया है। साथ ही इस टीम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के जिम्मेदारी पीयूष गोयल को दी गई है। वहीं भाजपा केंद्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ और केंद्रीय कार्यालय सचिव महेंद्र पांडे को बनाया गया है। शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव बनाया गया है। राजेश मंगल को राष्ट्रीय सयुंक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया है। यहां क्लिल कर पढ़ें पूरी खबर…