अजय मिश्र टेनी के मंच से गायब होने पर कांग्रेस ने दागा सवाल- क्या सामने दिख रही हार से डर गए नरेंद्र मोदी?

लखनऊ में हुई DGP कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी के साथ कानून व्यवस्था को संभालने वाले उच्च अधिकारियों संग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को भी शामिल होना था।

Narendra Modi, Amit Shah
लखनऊ में 56वीं डीजीपी कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फोटो सोर्स: ट्विटर/@INCUttarPradesh)।

कृषि कानूनों की वापसी के बाद विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्ष का दावा है कि चुनावों में हार के डर से नरेंद्र मोदी ने इस तरह का फैसला लिया है। वहीं किसान आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने लखीमपुर हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की मांग की है।

इस बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने लखनऊ में 21 नवंबर को आयोजित हुए 56वें पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक सम्मेलन की एक फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि अजय मिश्रा टेनी जो कल तक मंच पर थे, अब फ़ोटो से गायब हो चुके हैं। क्या सामने दिख रही हार से नरेंद्र मोदी डर गए हैं?

बता दें कि लखनऊ में हुई DGP कॉन्फ्रेंस में कानून व्यवस्था को संभालने वाले उच्च अधिकारियों संग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शामिल होना था। लेकिन जो फोटो सामने आई है, उसमें अजय मिश्रा टेनी नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में विपक्ष का दावा है कि चुनावों में हार के डर से कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब नरेंद्र मोदी अजय मिश्रा से भी दूरी बनाकर चल रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक अजय मिश्रा डीजीपी सम्मेलन में शनिवार को कुछ क्षणों के लिए जरूर शामिल हुए थे लेकिन उसके बाद वो दिखाई नहीं दिए। यहां तक कि पीएम मोदी के साथ हुए फोटो सेशन में वो नहीं दिखे। इस मौके पर गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और निशिथ प्रमाणिक मौजूद थे। गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी हिंसा में अजय मिश्रा टेनी के बेटे की गाड़ी से किसानों के कुचले जाने का आरोप है। इस हिंसा में 4 किसानों समेत कुल 8 लोगों की मौत हुई थी।

राकेश टिकैत की मांग: 22 नवंबर को लखनऊ के ईको गार्डन में राकेश टिकैत ने मांग रखते हुए कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त किया जाए और MSP गारंटी पर क़ानून बने। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान 750 किसानों की मृत्यु हुई, उनके परिवार का ध्यान रखा जाए। इसके अलावा टिकैत ने कहा कि दूध के लिए भी एक नीति आ रही है उसके भी हम ख़िलाफ़ है, बीज क़ानून भी है। इन सब पर हम सरकार से बातचीत करना चाहते हैं।

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