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‘देश में सात से आठ गुणा बढ़ी मुस्लिम आबादी, पर पाकिस्तान में कहां गए हिंदू ये किसी को पता भी नहीं’, योगी आदित्यनाथ का बयान

योगी ने कहा कि भारत में मुस्लिम आबादी 1947 के बाद सात से आठ गुना बढ़ गई है। किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिम कहां गए, ये किसी को पता नहीं है।

Author Edited By रवि रंजन गया | Published on: January 15, 2020 9:51 AM
बिहार के गया में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेता। (Express photo by Rakesh Praveer)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि विभाजन के बाद से भारत में मुस्लिम आबादी कई गुना बढ़ गई क्योंकि उन्हें पाकिस्तान के विपरीत विशेष अधिकार और सुविधाएं दी गईं। लेकिन पाकिस्तान में हिंदू कहां गए, किसी को नहीं पता है। साथ ही उन्होंने ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” से नाराज लोगों द्वारा रची गई साजिश बताते हुए कहा कि इसे ‘‘कुटिल’’ विपक्ष का समर्थन हासिल है।

बिहार के गया जिला स्थित गांधी मैदान में सीएए के समर्थन में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए भाजपा नेता योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि इस कानून का विरोध करने वाले लोग राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करने का “पाप” कर रहे हैं। योगी ने कहा, “भारत में मुस्लिम आबादी 1947 के बाद सात से आठ गुना बढ़ गई है। किसी को कोई आपत्ति नहीं है। यदि वे देश के नागरिक के रूप में विकास के लिए काम करते हैं, तो उनका स्वागत है। उनकी आबादी बढ़ गई है क्योंकि उन्हें विशेष अधिकार और सुविधाएं दी गई हैं। उनकी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए गए। लेकिन पाकिस्तान में क्या हुआ?” उन्होंने पूछा कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी 1947 से कम क्यों हो गई? पाकिस्तान के हिंदू कहां गए, किसी को नहीं पता है।

योगी ने कहा, ‘‘सुशील कुमार मोदी (बिहार के उपमुख्यमंत्री) और संजय जायसवाल (बिहार भाजपा अध्यक्ष) ने मुझसे पहले अपने संबोधन में बहुत अच्छी तरह से बताया है कि सीएए सताए जाने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने के बारे में है और यह किसी की नागरिकता लेने के बारे में नहीं। इस तरह का कदम उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह प्रशंसा के पात्र हैं पर ऐसा किए जाने के बजाय उन पर प्रहार किया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और कुटिल विपक्ष आग में घी डालने का काम कर रहा है। लेकिन देश के लोगों को यह समझने की जरूरत है कि यह दूर से रची गई साजिश है।’’ योगी ने दावा किया कि ये वे लोग हैं जो कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ से नाराज हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में संविधान के नाम पर सीएए का विरोध करने का उतावलापन है जबकि उसने आपातकाल लगाकर संविधान का गला घोंट दिया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के पीछे तीन बड़े कारण गिनाते हुए कहा कि देश में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाने, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही विरोध का तीसरा बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का विश्व में बढ़ता प्रभाव और सम्मान है।

योगी ने कहा कि आज विश्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर विश्व के सभी देश चिंतित हैं। लेकिन विश्व पटल पर तनाव को कम और समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से मध्यस्थता करने की बात कही जा रही है जो दर्शाता है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी का महत्व विश्व बिरादरी में क्या है? योगी ने कहा कि मोदी सरकार धार्मिक आधार पर लोगों के खिलाफ भेदभाव नहीं करती है। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं से कई लोग लाभान्वित हुए है।

उन्होंने कहा, ‘‘क्या किसी को लाभार्थी के रूप में शामिल करने से पहले पूछा गया था कि उनका धर्म या जाति क्या है?’’ योगी ने कहा, ‘‘यह नया भारत, पाकिस्तान की परमाणु शक्ति से डरता नहीं है, जैसा कि पहले कांग्रेस करती थी।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने से पाकिस्तान चिंता में पड़ गया है कि उसके हाथ से पीओके भी निकलकर भारत के हाथ में जा सकता है।’’ योगी ने कहा कि श्री अरबिंदो ने कहा था कि मौजूदा समय में सबसे बड़ा पुण्य राष्ट्रीय हित के लिए काम करना है और सबसे बड़ा पाप इसके खिलाफ काम करना है। विपक्ष पाप कर रहा है। इसे आपको भीमराव आंबेडकर और जोगेंद्र नाथ मंडल के उदाहरण से समझना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘आंबेडकर अपने देश के प्रति निष्ठावान थे जबकि मंडल जिन्ना की तरफ झुक गये और पाकिस्तान के निर्माण में मदद की और उस देश में मंत्री बने।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जहां आंबेडकर श्रद्धेय शख्सियत हैं, वहीं मंडल ने पाकिस्तान में दस साल के भीतर ही इतनी घुटन महसूस की कि उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और कोलकाता चले आए, जहां उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष गुमनामी में बिताए। याद रहे कि जो भी राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करता है, उनकी यही दशा होती है।’’ (भाषा इनपुट के साथ)

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