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एकता दल के विलय पर सपा में कितनी एकता, दिखेगा कल

क्या 25 जून को समाजवादी पार्टी कौमी एकता दल के साथ किए गए विलय को समाप्त कर अखिलेश यादव को दोबारा अपराध के खिलाफ नायक के तौर पर पेश करेगी?

Author लखनऊ | June 24, 2016 00:38 am
CM अखिलेश यादव

क्या 25 जून को समाजवादी पार्टी कौमी एकता दल के साथ किए गए विलय को समाप्त कर अखिलेश यादव को दोबारा अपराध के खिलाफ नायक के तौर पर पेश करेगी? क्या बहुजन समाज पार्टी छोड़ कर आने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य अकेले नेता रहेंगे या उन जैसे कई और बसपा छोड़ने की तैयारी में हैं? आखिर सभी विधायकों को 25 जून को ही लखनऊ बुला कर मायावती बैठक क्यों करना चाहती हैं? इन जैसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब इसी 25 तारीख को आना है।

समाजवादी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने 25 जून को लखनऊ में संसदीय दल की बैठक बुलाई है। समाजवादी पार्टी के उच्च पदस्त सूत्र बताते हैं कि इसी बैठक में कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय पर सभी नेताओं की राय जानने के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा। कौमी एकता दल की शक्ल में समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता एक ऐसा अवसर देख रहे हैं जिसके जरिए वे वही माहौल खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं, जैसा पिछले विधानसभा चुनाव में किया था।

समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि यदि कौमी एकता दल के साथ हुए विलय को संसदीय दल की बैठक में नामंजूर कर दिया जाता है, तो इसका बड़ा लाभ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मिलेगा। ऐसा होने पर अखिलेश की छवि अपराध के खिलाफ खड़े होने वाले सपा नेता के तौर पर दबारा स्थापित हो सकती है। 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान डीपी यादव को टिकट न देने का एलान कर अखिलेश यादव ने एक ही पल में राज्य के लोगों के दिलों में अपना-अलग स्थान हासिल कर लिया था।

सूत्र बताते हैं कि कौमी एकता दल के साथ विलय समाप्त कर समाजवादी पार्टी दोबारा अपने इस युवा चेहरे को हीरो बनाने के बारे में संसदीय दल की बैठक में बेहद गंभीरता से विचार कर सकती है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को कौमी एकता दल के सपा में विलय के सवाल को पार्टी के अंदर की बात कह कर यह साफ कर दिया कि वे इस मामले में अभी गोपनीयता बनाए रखना चाहते हैं। इस मामले में काफी कुरेदने पर उन्होंने कहा, जो पार्टी फैसला करेगी, उसे सब मानेंगे। उनकी बात से साफ है कि इस मामले में अभी फैसला आना बाकी है। जिसे सभी को स्वीकार करना होगा।

वहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी 25 जून को अपने सभी विधायकों को लखनऊ तलब किया है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने की भनक न लगने से परेशान बहनजी ने विधायकों को लखनऊ यूं ही नहीं बुलाया है। बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
ऐसा कर वह पार्टी के भीतर के हालात का सटीक आकलन करने की कोशिश में हैं। मौर्र्य के बसपा छोड़ने के बाद बहनजी को इस बात की शंका है कि कई और विधायक भी मौर्य के नक्शे कदम पर चल सकते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को जिस तरह स्वामी प्रसाद मौर्य को अच्छा और बड़ा नेता करार दिया और कहा कि वे गलत दल में थे।

बसपा सुप्रीमो के 25 जून को विधायकों की बैठक बुलाने के सवाल पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, मायावती को अपने विधायकों की चिंता सता रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य के पहले भी कई नेताओं ने बसपा छोड़ी है। इससे मायावती को विधायकों को बांधे रखने की चिंता है।

जबकि कौमी एकता दल के विलय ने समाजवादी पार्टी के उस किरदार को जिंदा कर दिया है, जिसको आधार बना कर राज्य में उस पर अपराधियों के साथ साठगांठ के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि 25 जून की तारीख उत्तर प्रदेश की सियासत के पुराने सवालों के क्या जवाब लाती है या उन जवाबों के साथ ही कई ऐसे सवाल भी खड़े करती है, जिसका विधानसभा चुनाव में बड़ा असर हो सकता है?

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