UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और अब इसमें महज 10 महीनों का ही वक्त बचा है। इससे पहले राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा कैबिनेट विस्तार हो गया है, जिसमे कुल 8 मंत्रियों ने शपथ ली है। इनमें दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट रैंक के लिए प्रमोट किया गया है, जबकि 6 नए चेहरों को शामिल भी किया गया है। चुनाव से पहले इस कैबिनेट विस्तार को जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के साधने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बता दें कि 6 नए चेहरों के आने के साथ ही योगी कैबिनेट की सीमा पूरी गई है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट में 60 मंत्री हो सकते हैं। विस्तार से पहले 54 मंत्री थे। अब 60 मंत्री हो गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले इस कैबिनेट विस्तार को बीजेपी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इन नए मंत्रियों में भूपेंद्र चौधरी, कैलाश सिंह राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और मनोज पांडेय शामिल हैं। वहीं दो मंत्री- सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल सिंह का कद बढ़ गया है।
चुनाव से पहले खास मकसद से हुआ विस्तार
योगी कैबिनेट में इस विस्तार के जरिए बीजेपी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुानव से पहले नाराज जातियों को खुश करने की कोशिश की है। इसके अलावा क्षेत्रीय संतुलन बनाना और दलबदलुओं को जगह देकर दूसरी पार्टियों के नेताओं को लुभाने जैसे संदेश निकल कर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल की प्रचंड जीत के बाद महिलाएं और अति पिछड़ों की लामबंदी के हिट फार्मूले को बीजेपी यूपी में भी लागू करना चाह रही है।
अनुमान है कि बीजेपी जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम का नए सिरे से गठन भी कर सकती है। संगठन में कई नाराज नेताओं को भी जगह मिल सकती है। इसके जरिए सरकार और संगठन में संतुलन बिठाकर 2027 चुनाव के लिए बीजेपी आक्रामकता से अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के खिलाफ चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है।
कौन-कौन बने योगी कैबिनेट के मंत्री?
भूपेंद्र चौधरी: कैबिनेट मंत्री बने हैं। पश्चिमी यूपी के बड़े जाट नेता हैं। 2016 में पहली बार MLC बने। पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगठन और सरकार में गहरी पकड़ है।
मनोज पांडेय: रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए। अवध और पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण नेता हैं। ब्राह्मण समीकरण साधने में बड़ा चेहरा हैं।
अजीत सिंह पाल: वे पहले राज्य मंत्री थे। अब स्वतंत्र प्रभार रहेगा। यूपी के सिकंदरा से बीजेपी विधायक हैं। अति पिछड़ा समाज के प्रमुख चेहरा हैं। संगठन और जमीनी राजनीति में सक्रिय हैं।
सोमेंद्र तोमर: गाजियाबाद की मोदीनगर सीट से विधायक हैं। पश्चिमी यूपी में गुर्जर समाज का प्रमुख चेहरा हैं। जमीनी राजनीति और संगठन में सक्रिय भूमिका है। 2022 में पहली बार विधायक बने थे।
कृष्णा पासवान: वे फतेहपुर से BJP विधायक हैं। 4 बार विधायक और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। दलित चेहरे के तौर पर मजबूत पहचान है। योगी कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाई गई हैं।
कैलाश सिंह राजपूत: कन्नौज की तिर्वा सीट से बीजेपी विधायक हैं। 1996 में पहली बार विधायक बने थे। साल 2017 में फिर बीजेपी में लौटे थे। कन्नौज की सियासत में मजबूत पकड़ है। राज्य मंत्री बनाए गए हैं।
सुरेंद्र दिलेर: वे अलीगढ़ की खैर सीट से बीजेपी विधायक हैं। दलित युवा चेहरा हैं। पूर्व बीजेपी सांसद राजवीर दिलेर के बेटे हैं. दादा किशन दिलेर 6 बार के विधायक रहे हैं। योगी कैबिनेट में राज्य मंत्री बने हैं।
हंसराज विश्वकर्मा: बीजेपी के MLC हैं। पिछड़ा वर्ग राजनीति में मजबूत पकड़ है। करीब 34 साल से राजनीति में एक्टिव हैं। राम मंदिर आंदोलन में काफी सक्रिय रहे। वाराणसी में बीजेपी को मजबूत करने का श्रेय जाता है। राज्य मंत्री बनाए गए हैं।
राम, शिव और कृष्ण के बाद अब यूपी बनाएगा गुरु गोरखनाथ आध्यात्मिक सर्किट, नाथ परंपरा के तीर्थ स्थलों को जोड़ेगी नई योजना
उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन को बहुत बड़े स्तर पर विकसित किया है। पहले राज्य सरकार ने भगवान राम से जुड़े स्थानों को मिलाकर अयोध्या को एक बड़ा धार्मिक केंद्र बनाया। इसके बाद काशी (वाराणसी) को भगवान शिव से जोड़ा गया और मथुरा को भगवान कृष्ण की परंपरा के रूप में विकसित किया गया। पढ़िए पूरी खबर…
