उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने भारत और नेपाल दोनों देशों की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज हासिल कर रखे थे और दोनों देशों के आधिकारिक पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, यह मामला जिला प्रशासन की जांच के दौरान सामने आया। जांच में पाया गया कि सभी आरोपी एक ही समुदाय से हैं और उनके पास भारत और नेपाल दोनों देशों के मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) समेत अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद थे। इसके अलावा, उनके नाम भारत और नेपाल दोनों देशों की मतदाता सूची में भी दर्ज पाए गए।

पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने कथित तौर पर आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य भारतीय दस्तावेज फर्जी तरीके से बनवाए और उनका इस्तेमाल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किया।

किन धाराओं में हुई एफआईआर दर्ज

इस मामले में जरवा थाना में धोखाधड़ी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की नागरिकता की पुष्टि के लिए उनका विवरण नेपाल के संबंधित अधिकारियों को भी भेजा जाएगा।

जिला प्रशासन ने शुरुआती जांच में 27 संदिग्ध दोहरी नागरिकता वाले लोगों की पहचान की थी। हालांकि, प्रारंभिक जांच के दौरान अब्दुल रहमान (79 वर्ष) अपने पते पर नहीं मिले, जबकि अब्दुल अजीज सिद्दीकी (76 वर्ष) का निधन हो चुका था।

पुलिस के मुताबिक, जिन 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी मूल रूप से नेपाल के दांग जिले के निवासी हैं लेकिन वर्तमान में बलरामपुर के बलापुर, शीतलपुर गांव और तुलसीपुर कस्बे में रह रहे थे। पुलिस का कहना है कि ये लोग जरवा बॉर्डर के रास्ते नियमित रूप से भारत-नेपाल सीमा पार करते थे और दिहाड़ी मजदूरी करके अपना जीवनयापन करते थे।

बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकास कुमार ने कहा, ”जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपियों ने किन-किन सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लिया है और अगर लिया है तो किस तरह लिया है।”