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उप्र विधानसभा चुनाव: स्मृति के तीखे तेवरों से सकते में हैं भाजपाई

लोकसभा और राज्यसभा में स्मृति ईरानी ने जिस तरह कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष को निशाने पर लिया उससे उत्तर प्रदेश के कई भाजपा नेताओं का रक्तचाप बढ़ गया है।

Author लखनऊ | March 2, 2016 2:12 PM
संसद में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में साल भर बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर भितरघात, जातिवाद और आत्ममुग्धता में फंसे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अपने-अपने गुटों को सक्रिय करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। मगर ये नेता इस अंदेशे से बाहर नहीं आ पा रहे हैं कि पार्टी आलाकमान चुनावों के दौरान स्मृति ईरानी को अहम जिम्मेदारी के साथ चुनाव मैदान में उतार सकता है।

लोकसभा और राज्यसभा में स्मृति ईरानी ने जिस तरह कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष को निशाने पर लिया (खास तौर पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर जिस तरह निशाना साधा) उससे सूबे के कई भाजपा नेताओं का रक्तचाप बढ़ गया है। सूबे के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की नजरें केंद्रीय नेतृत्व पर लगी है कि वह उप्र. विधानसभा चुनावों में ईरानी को कौनसी भूमिका सौंपता है। बीते दो दशकों से भाजपा के अंदर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य बिरादरी का गुट बनाकर राजनीति करते आ रहे नेताओं के बीच भी इस बात की चर्चा जोरों पर है।

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी को कड़ी टक्कर देने वाली ईरानी का भाजपा शीर्ष नेतृत्व में दखल किसी से छिपा नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने अमेठी में ईरानी को अपनी बहन करार देकर उत्तर प्रदेश के पार्टी नेताओं के बीच उनके कद को बढ़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी। सत्ताधारी समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल यह मुद्दा उठा रहे हैं कि इस वक्त भाजपा के पास सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने के लिए कोई चेहरा नहीं है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मुख्यमंत्री के तौर पर लोकप्रिय चेहरे की तलाश में ईरानी मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ भाजपा नेता कहते हैं कि ईरानी के मुखर वक्तव्यों से यह साफ है कि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें सूबे में अहम जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति बना चुका है। इस रणनीति को सूबे से वरिष्ठ भाजपा नेता जानते हैं, मगर वे खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

ईरानी के विधानसभा चुनाव में बतौर स्टार प्रचारक संभावित इस्तेमाल पर बसपा के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य चुटकी लेकर कहते हैं कि सूबे में भाजपा के पास नेताओं का टोटा है। ईरानी का नाम लिए बिना मौर्य ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व इस अभाव के चलते ऊपर से नाम लाकर प्रदेश भाजपाइयों पर थोपने की तैयारी कर रहा है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व राज्य में चाहे उमा भारती को लाए या स्मृति ईरानी के दम पर फतह हासिल करने का सब्जबाग देखे, इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है। बकौल मौर्य उत्तर प्रदेश में भाजपा मुद्दाविहीन और नेताविहीन पार्टी है, इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता।

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