यूपीः सपा-रालोद के बीच गठबंधन तय, अखिलेश के साथ जयंत चौधरी ने तस्वीर पोस्ट कर दिया दोस्ती का इशारा

जयंत चौधरी ने मुलाकात के बाद तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘बढ़ते कदम!’। उधर, पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी रालोद के राष्ट्रीय के साथ अपनी तस्वीर साझा की है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा- जयंत चौधरी जी के साथ बदलाव की ओर।

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सपा-रालोद के प्रमुखों के ट्विटर अकाउंट देखकर लगता है कि एक साथ आने को वो तैयार हैं। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश की सपा और रालोद मिलकर चुनाव लड़ने जा रही हैं। मंगलवार को रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की। मुलाकात को लेकर ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन दोनों नेताओं के ट्विटर अकाउंट देखकर लगता है कि एक साथ आने को वो तैयार हैं।

जयंत चौधरी ने मुलाकात के बाद तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘बढ़ते कदम!’। उधर, पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी रालोद के राष्ट्रीय के साथ अपनी तस्वीर साझा की है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा- जयंत चौधरी जी के साथ बदलाव की ओर। सूत्रों के मुताबिक सीटों के बंटवारे को लेकर रालोद और सपा के बीच सहमति बन गई है। बुधवार को दोनों ही नेता गठबंधन का एलान कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि जयंत ने 50 सीटों की मांग की है। सपा प्रमुख उनकी बातों पर सहमत दिख रहे हैं।

दोनों के बीच चुनाव में गठबंधन की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। लेकिन कुछ सीटों पर पेंच फंस रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चार से पांच सीटें ऐसी भी हैं जिन पर दोनों दल अपना दावा ठोक रहे हैं। सबसे अहम मुद्दा चरथावाल विधानसभा सीट का है। इस सीट पर दोनों दल अपना उम्मीदवार उतारने पर अड़े हैं। अखिलेश इस सीट से हरेन्द्र मलिक को टिकट देना चाहते हैं, जबकि जयंत खुद इस सीट से विधानसभा चुनाव में कस्मित आजमाना के लिए उत्सुक हैं। हरेन्द्र हाल ही में सपा में आए थे। वो खुद भी चरथावाल विधानसभा सीट मांग रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि सपा प्रमुख सहयोगी दलों को गठबंधन के तहत अधिकतम 50 से 55 सीटें ही देने पर सहमत हैं। इनमें रालोद के अलावा ओम प्रकाश की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अन्य छोटे दल भी शामिल हैं। ऐसे में रालोद के हिस्से में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 25 और सुभासपा को पूर्वांचल की दर्जन भर से अधिक सीटें मिलने की उम्मीद है।

ध्यान रहे कि यूपी में बीजेपी का मुकाबला सपा के साथ माना जा रहा है। दोनों ही दल एक दूसरे को मात देने के लिए अपना कुनबा बढ़ाने में जुटे हैं। बसपा और कांग्रेस अकेले मैदान में उतरेंगी। बसपा की मायावती ने फिलहाल घोषणा पत्र जारी करने से भी किनारा कर लिया है। उनका मानना है कि पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर वो जनता के बीच जाएंगी तो प्रियंका गांधी ने महिलाओं को तरजीह दे अपना दांव चला है।

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