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सोशल मीडिया: सरकार के नए नियमन कितने दमदार नियम, कितने सवाल बाकी

सरकार ने सोशल मीडिया के लिए नए नियमन घोषित किए हैं। समाचारों के डिजिटल प्रारूप और मनोरंजन करने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए स्वनियमन की बात की गई है।

( ऊपर ) नए नियमन घोषित करते केंद्रीय आइटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद। (फाइल फोटो)। ( नीचे से बाएं ) पवन दुग्गल, आइटी कानून विशेषज्ञ। विवेक अग्निहोत्री, फिल्म निर्देशक। फाइल फोटो।

सरकार ने सोशल मीडिया के लिए नए नियमन घोषित किए हैं। समाचारों के डिजिटल प्रारूप और मनोरंजन करने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए स्वनियमन की बात की गई है। सरकार ने कोई नया कानून नहीं बनाया, लेकिन सूचना-तकनीक अधिनियम-2000 के तहत नए नियम बनाए हैं। नाम दिया गया है- सूचना तकनीक (अंतरमध्यवर्ती दिशानिर्देश एवं डिजीटल मीडिया कोड) कानून 2021 और इसमें ही सोशल मीडिया, ओटीटी व डिजिटल समाचार कंपनियों के लिए दिशानिर्देश तय किए हैं। तीन तरह के प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम-कायदे बनाए गए हैं- सोशल मीडिया, डिजिटल समाचार और ओवर-द-टॉप या ओटीटी प्लेटफॉर्म्स।

उपयोक्ताओं के लिए क्या

शिकायतें सुनी जाएंगी। अब तक उपयोक्ता के पास सोशल मीडिया पोस्ट्स के खिलाफ रिपोर्ट बटन था, लेकिन शिकायतों के निपटारे की पुख्ता प्रणाली नहीं थी। अब सोशल और डिजिटल मीडिया कंपनियों को ऐसा जरिया देना होगा, जहां शिकायत दर्ज होगी। दूसरे, शिकायतें कौन सुनेगा, यह पता रहेगा। कंपनियों को शिकायतें निपटाने वाले अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। ऐसे अधिकारी का नाम और उसके संपर्क का ब्योरा देना होगा। तीसरे, शिकायतों पर कितने दिन में कार्रवाई होगी, यह पता रहेगा। शिकायत अधिकारी को 24 घंटे के अंदर सुनवाई करनी होगी और 15 दिन के अंदर शिकायत को निपटाना होगा। चौथे, महिलाओं की शिकायतों पर 24 घंटे में कार्रवाई होगी।

कितने प्रकार की सख्ती

आठ तरह के नियमन तय किए गए हैं। पोस्ट के मूल को बताना होगा। यह बताना होगा कि सोशल मीडिया पर खुराफात सबसे पहले किसने शुरू की? अगर भारत के बाहर से इसका मूल है, तो भारत में इसे किसने सबसे पहले बढ़ाया, यह बताना होगा। दूसरे, देश की संप्रभुता, सुरक्षा, जनहित, विदेश नीति संबंध, यौन हिंसा जैसे मामलों में सूचना के मूल की जानकारी देनी होगी। जिन आरोपों के साबित होने पर पांच साल से ज्यादा की सजा हो सकती है, ऐसे मामलों में मूल (ओरिजिन) बताना होगा।

तीसरे, मुख्य शिकायत निपटान अधिकारी भारत का रहने वाला होगा। चौथे, एक मुख्य संपर्क अधिकारी होगा, जिससे सरकारी एजंसियां कभी भी संपर्क कर सकें। पांच, हर महीने रिपोर्ट जारी करनी होगी कि कितनी शिकायतें आर्इं और उन पर क्या कदम उठाए गए। छह, कंपनियों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भारत में मौजूद उनका एक संपर्क पता बताना होगा। सात, उपभोक्ताओं का सत्यापन करना होगा। आठ, अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी उपयोक्ता की सामग्री हटाता है तो उसे बताना पड़ेगा और उसकी बात सुननी होगी।

सोशल मीडिया नियमन

उपयोक्ता के लिए अच्छी बात यह है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग बंद होगा। फेक न्यूज, अफवाहें, दुष्प्रचार और आपत्तिजनक कंटेंट रोकने में सरकार को मदद मिलेगी। कंपनियों को ये बातें कही गई हैं- महिलाओं के सम्मान से जुड़ी सामग्री का खास ध्यान रखना होगा। अगर सोशल मीडिया पर किसी की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की जाती है, तो शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर हटाना होगा।

इसके लिए पीड़िता की शिकायत जरूरी नहीं होगी। कोई अदालत या सरकारी संस्था किसी आपत्तिजनक, शरारती ट्वीट या मैसेज के फर्स्ट ओरिजिनेटर की जानकारी मांगती है, तो कंपनियों को देनी होगी। कंपनियों को तीन महीने में तीन स्तर के अधिकारी नियुक्त करने होंगे। ये भारतीय नागरिक होंगे। जो उपयोक्ता अपना सत्यापन चाहता है, सोशल मीडिया कंपनियों को उसे इसकी व्यवस्था देनी होगी। जैसे ट्विटर सत्यापित खाते को ब्लू टिक देता है।

डिजिटल समाचार और ओटीटी प्लेफॉर्म

डिजिटल समाचार मीडिया के प्रकाशक को प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया नियमन का पालन करना होगा। इससे आॅफलाइन (प्रिंट और टीवी) और डिजिटल मीडिया के लिए एक-सा नियमन होगा। सरकार ने डिजिटल न्यूज मीडिया प्रकाशकों से प्रेस काउंसिल की तरह स्व नियमन संस्थान बनाने को कहा है। इसी तरह ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए कोड आॅफ एथिक्स की बात कही गई है।

इसका पालन आॅनलाइन न्यूज के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया कंपनियों को करना होगा। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को पांच श्रेणियों में सामग्री को बांटना होगा। उसे हर श्रेणी पर दिखाना होगा कि वह किस उम्र वाले लोगों के लिए है। अमेजन प्राइम वीडियो, डिज्नी हॉटस्टार समेत ज्यादातर ने यह नियम लागू कर रखा है।

क्या कहते
हैं जानकार

नए नियमन से गंदगी हट जाएगी तो ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। यह जरूर है कि सेवा प्रदाता बेलगाम नहीं रह जाएंगे। 2011 में बने नियमों में आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे दिए गए थे। इसे कम करते हुए 24 घंटे किया है। इससे और कम किया जाना चाहिए था।
– पवन दुग्गल, आइटी कानून विशेषज्ञ

नए नियम ओटीटी को दुरुस्त करेंगे और उन्हें आपत्तिजनक सामग्री लाने से रोकेंगे। दर्शकों को विकल्प मिलेगा। जब सामग्री ही सर्वोपरि हो गई है तो उसका पुख्ता होना जरूरी है। शिकायतों के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था से सिर्फ गंभीर कंपनियां ही इस क्षेत्र में रह सकेंगी।
– विवेक अग्निहोत्री, फिल्म निर्देशक

छह बातें जरूरी

1. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की एक संस्था रिटायर्ड जज या इस फील्ड के किसी विशेषज्ञ व्यक्ति की अध्यक्षता में बने। यह शिकायतों की सुनवाई करे और उस पर जो निर्णय आए, उसे माने।
2. ओटीटी और डिजिटल मीडिया को ब्योरा/खुलासा प्रकाशित करना होगा कि उन्हें सूचना कहां से मिली।
3. शिकायतें निपटाने की प्रणाली वैसी ही रखनी होगी, जैसा बाकी के लिए है।
4. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को पांच श्रेणियों में अपनी सामग्री को वर्गीकृत करना होगा। यू (यूनिवर्सल), यू/ए 7+, यू/ए 13+, यू/ए 16+ और ए यानी एडल्ट (वयस्क)।
5. यू/ए 13+ और इससे ऊपर की श्रेणी के लिए पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी ताकि वे बच्चों को इस तरह के कंटेंट से दूर रख सकें।
6. वयस्क श्रेणी में सामग्री देखने लायक उम्र है या नहीं, इसकी पुष्टि का भी तंत्र बनाना होगा।

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