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किसी आतंकी संगठन का सदस्य न होने पर भी घोषित कर सकेंगे आतंकवादी! बिल पर विपक्ष का हंगामा

थरुर के अनुसार, इस बिल का पूर्व में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी विरोध किया गया था। यह बिल भारत के संविधान के विरुद्ध है और इससे किसी व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों का हनन हो सकता है।

Author नई दिल्ली | July 9, 2019 9:21 AM
सरकार ने सोमवार को एक घंटे में 8 बिल संसद में पेश किए।

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में 8 बिल पेश किए। जिनका विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध किया गया। सबसे ज्यादा विरोध सरकार द्वारा पेश किए गए बिल Unlawful Activities(prevention) Amendment Bill को झेलना पड़ा। दरअसल इस बिल के पास होने के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियों को अधिकार मिल जाएगा कि वह किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित कर सकेंगे, फिर चाहे उसका संबंध किसी आतंकी संगठन से हो या नहीं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने इस बिल को लेकर जबरदस्त हंगामा किया। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस बिल के प्रावधान असंवैधानिक हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह एक कमजोर और जल्दबाजी में पेश किया गया बिल है। थरुर ने कहा कि यदि कोई लोन-वोल्फ आतंकी है भी तो सरकार के पास उसे गिरफ्तार करने के लिए काफी पॉवर है। कई तरीकों से ऐसे लोगों को डील किया जा सकता है। थरुर ने कहा कि यदि किसी को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किया जाता है तो उसे साल 2007 के यूएन ऑर्डर के तहत नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में आपको किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के लिए UAPA बिल की क्या जरुरत है?

कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस कानून के गलत इस्तेमाल की आशंका बहुत ज्यादा है। साथ ही प्री-लेजिस्लेटिव कंसल्टेशन पॉलिसी, 2014 के तहत इस बिल को पेश करने से पहले सार्वजनिक चर्चा भी नहीं की गई। थरुर के अनुसार, इस बिल का पूर्व में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी विरोध किया गया था। यह बिल भारत के संविधान के विरुद्ध है और इससे किसी व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों का हनन हो सकता है। थरुर ने कहा कि यह बिल सरकार को संविधान के अतिरिक्त शक्तियां दे देगा।

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य और कोल्लम से सांसद एनके प्रेमचंद्रन के अनुसार, उक्त बिल किसी नागरिक के जीवन के अधिकार और आजादी का उल्लंघन करता है, जो कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत दी गई हैं। प्रेमचंद्रन के अनुसार, हर कोई चाहता है कि आतंकवाद पर रोक लगे, लेकिन इससे नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।

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