सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी नियमावली पर रोक लगाए जाने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (आरएसएस) का भी इस मामले में बयान सामने आ गया है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मंगलवार को कहा कि उनका संगठन समाज में एकता के पक्ष में है और इसे बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नियमों पर रोक लगा दी थी। 

सुनील आंबेकर ने कहा, ”अदालत ने दिशा-निर्देशों पर रोक लगा दी है। अलग-अलग लोगों ने अपने विचार रखे हैं और मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। संघ का मानना ​​है कि समाज में एकता होनी चाहिए। हम सभी एकता बनाए रखने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे।”

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यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ हुए थे प्रदर्शन

पिछले महीने केंद्र सरकार ने नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के अनुसार सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए समितियां बनानी होंगी। यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांग और महिला सदस्य शामिल होने चाहिए। 

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देश के कई राज्यों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बड़ी संख्या में लोग इनके समर्थन में भी उतर आए थे।  

आलोचकों को दिया जवाब

स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस के योगदान पर सवाल उठाने वालों की आलोचना का जवाब देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ को 100 साल बाद यह बताने की जरूरत नहीं है कि उसने देश की संप्रभुता और एकता को बनाए रखने के लिए क्या किया है। उन्होंने कहा, ”संघ का गठन भी इसी उद्देश्य से हुआ। संघ ने जो कुछ भी किया है, वह देश के लिए ही किया है।” 

‘शहर को हरे रंग में रंगने’ से जुड़े हालिया विवाद के बारे में पूछे जाने पर आंबेकर ने कहा कि देश का रंग हजारों वर्षों से भगवा रहा है। ठाणे में एआईएमआईएम की एक पार्षद ने कहा था कि उनकी पार्टी मुंब्रा को हरे रंग से रंग देगी। 

हाल में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों में भाषा की अहम भूमिका के मुद्दे पर आंबेकर ने कहा कि आरएसएस का रुख यह रहा है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि देश की परंपरा रही है कि सभी भाषाएं एक साथ खुशी-खुशी फलती-फूलती हैं। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने महानगरपालिका चुनावों में मराठी भाषा और अस्मिता को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था।

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