केंद्र की मोदी सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंत्रियों की पहुंच बढ़ाने और जनता से जुड़ाव पर लगातार जोर दे रही है। बुधवार, 19 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्रियों को पिछले साढ़े तीन महीनों के दौरान चारों सोशल मीडिया (एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन) प्लेटफार्मों पर उनकी गतिविधियों का पूरा ब्योरा और प्रदर्शन का विश्लेषण दिया गया।
इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया है कि विश्लेषण में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंत्रियों की डिजिटल पहुंच और लोगों की उनसे जुड़ाव की तुलना भी की गई। मंत्रियों को सलाह दी गई कि वे इन प्लेटफॉर्म पर अपनी गतिविधियां बढ़ाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बैठक के बाद हर मंत्री को एक लिफाफा दिया गया। इसमें 1 मई से 15 अगस्त तक सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों का ब्योरा था। इसमें एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन पर उनके प्रदर्शन का आकलन किया गया था।
रोजाना के पोस्ट और लाइक्स का भी विश्लेषण किया गया
इसके लिए रोजाना औसतन कितने पोस्ट किए गए, हर पोस्ट पर कितना जुड़ाव (Engagements) मिला, कुल कितने लाइक मिले, फॉलो करने वाले लोग किन देशों से हैं और हर पोस्ट को कुल मिलाकर कितनी प्रतिक्रिया मिली, जैसे आंकड़ों को आधार बनाया गया। सूत्रों ने बताया कि विपक्षी नेताओं समेत दूसरे राजनीतिक नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट को मिली प्रतिक्रिया की भी तुलना की गई।
बुधवार की कैबिनेट बैठक में वरिष्ठ मंत्री निर्मला सीतारमण, एस जयशंकर और पीयूष गोयल मौजूद नहीं थे। सीतारमण, जयशंकर, गोयल और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के साथ एक मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। यह प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के साथ आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत के लिए सिंगापुर गया है।
एक सूत्र ने बताया कि मंत्रियों को समय-समय पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट के प्रदर्शन का ऐसा विश्लेषण दिया जाता है। सूत्र ने कहा कि इस आकलन का मकसद सिर्फ मंत्रियों को अपनी डिजिटल पहुंच बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जेन जी के साथ जुड़ने पर जोर देने के बाद इस बार का यह विश्लेषण खास महत्व रखता है।
मंत्रियों और बीजेपी के दूसरे नेताओं को भी सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियां बढ़ाने और युवाओं के साथ ज्यादा जुड़ने की सलाह दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार अपनी पार्टी के नेताओं, जिनमें मंत्री और मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, से कहते रहे हैं कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीधे लोगों तक पहुंचने और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए करें। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी-एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी गतिविधियों का ब्योरा हमेशा उनके प्रदर्शन के आकलन का एक हिस्सा होता है।
पिछले महीने नीट पेपर लीक मामले और दूसरी अनियमितताओं को लेकर जेन जी के युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बाद बीजेपी नेताओं ने डिजिटल मीडिया पर युवाओं के साथ सीधे जुड़ने पर काफी ज्यादा जोर देना शुरू कर दिया है। इन विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इंस्टाग्राम पर सेल्फी-स्टाइल वीडियो का इस्तेमाल बढ़ाया है। इसे जेन जी के वोटरों के साथ सीधे और पारंपरिक तरीकों से अलग तरीके से संवाद स्थापित करने की एक रणनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश के छात्रों ने स्कूल से जुड़ी अपनी शिकायतों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए। इसमें उन्होंने लखनऊ और उन्नाव में सड़कें जाम की, हमीरपुर में कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और कन्नौज में खुद को हॉस्टल के अंदर बंद कर लिया ताकि अधिकारी उनकी बात सुनें। अब उनकी मांगों की बात की जाए तो उन्होंने ज्यादा शिक्षक, बेहतर खाना, पीने का पानी, ठीक से चलने वाले पंखे, साफ-सुथरे परिसर और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग की। इनमें से तीन विरोध-प्रदर्शन लखनऊ और उन्नाव के सर्वोदय आवासीय स्कूलों में कुछ ही दिनों के अंतर पर हुए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
