‘चिंतन शिविरों’ में कार पूलिंग के जरिए पहुंचें केंद्रीय मंत्री- आपस में संवाद बढ़ाने के मकसद से PM ने दिया सुझावः रिपोर्ट

एक नई पहल के तहत केद्रीय मंत्री चिंतन शिवरों की बैठकों में जाने के लिए कार पूलिंग का प्रयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में इसका सुझाव दिया था।

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पीएम के सुझाव पर केंद्रीय मंत्री कर रहे कार पूलिंग (फाइल फोटो- पीटीआई)

चिंतन शिविरों में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री आजकल कार पूलिंग का प्रयोग कर रहे हैं। पीएम मोदी ने मंत्रियों को इस नई पहल का सुझाव दिया था। केंद्रीय मंत्री की बैठकों का चिंतन शिविर का नाम दिया गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केंद्रीय मंत्रियों ने इसका प्रयोग शुरू कर दिया है। चिंतन शिविरों का मकसद समग्र शासन में सुधार लाने के लिए किया जा रहा है। दक्षता, समय प्रबंधन, परियोजनाओं और नीतियों पर केंद्रित, अब तक ऐसी चार बैठकें हो चुकी हैं। इसके तहत एक कार में कैबिनेट मंत्री के साथ आमतौर पर दो राज्य मंत्री होते हैं। कार पूलिंग का उद्देश्य मंत्रियों के बीच संवाद को बढ़ाना है। पीएम मोदी के सुझाव के बाद तीसरी बैठक से मंत्रियों ने इसे लागू कर दिया था।

पिछली बैठकों, जिसे चिंतन शिविर कहा जा रहा है, में अबतक केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मनसुख मंडाविया, पीयूष गोयल, गजेंद्र शेखावत, नरेंद्र सिंह तोमर और हरदीप सिंह पुरी ने प्रजेंटेशन दे चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद विभिन्न विषयों पर फ्री-व्हीलिंग पर चर्चा हुई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये सुझाव दिया।

इसी बैठक में पीएम मोदी ने सुझाव दिया था कि संबंधित विभाग के सभी मंत्री कार पूल से एक साथ आएं और बैठक के दौरान एक साथ बैठें ताकि उनके बीच संचार और समन्वय बेहतर हो सके। बैठक के दौरान भी उन्हें बेहतर संचार के लिए अपने मंत्रालय से जुड़े मुद्दों पर आपस में चर्चा करनी चाहिए। इसके बाद कार पूलिंग का आइडिया केंद्रीय मंत्रियों ने लागू कर लिया था।

इसी कड़ी की चौथी बैठक मंगलवार को हुई, जहां दो केंद्रीय मंत्रियों ने शासन से जुड़े सामान्य मुद्दों और मंत्रियों के रोजमर्रा के मामलों पर प्रजेंटेशन दी। इस सीरीज की पहली बैठक 14 सितंबर को हुई थी। इस बैठक के बाद ही बताया गया था कि ऐसी बैठकें और होंगी ताकि शासन में और सुधार पर चर्चा हो सके। इसके बाद 28 सितंबर को बैठक हुई, जहां केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और गजेंद्र शेखावत ने प्रजेंटेशन दिया था। तीसरी बैठक 21 अक्टूबर को हुई थी। इसमें शासन और नीति निर्माण पर किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया गया था। इन बैठकों की अध्यक्षता खुद पीएम मोदी करते हैं।

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