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केंद्रीय मंत्री ने संसद में किया साफ- सोशल मीडिया से Aadhaar Card को जोड़ने का नहीं कोई प्रस्ताव

अश्विनी उपाध्याय का दावा था कि इससे फर्जी खबरों, अश्लील कंटेंट और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम लगायी जा सकेगी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा था।

Author नई दिल्ली | Published on: November 20, 2019 8:35 PM
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद। (फाइल फोटो)

बीते दिनों ऐसी खबर आयी थी कि सरकार आधार कार्ड और सोशल मीडिया अकाउंट को लिंक करने पर विचार कर रही है। हालांकि आज केन्द्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में साफ कर दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में दिए लिखित जवाब में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘सरकार का आधार और सोशल मीडिया अकाउंट को लिंक करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’ बता दें कि भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधार से जोड़ने की मांग की गई थी।

अश्विनी उपाध्याय का दावा था कि इससे फर्जी खबरों, अश्लील कंटेंट और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम लगायी जा सकेगी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा था। सरकार के जवाब के बाद ही सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई फैसला देने वाला था। बहरहाल अब सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि उसकी फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।

रविशंकर प्रसाद ने संसद में पेगासस मालवेयर के मुद्दे पर सफाई देते हुए ये भी कहा कि सरकार डाटा सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए पूरी तरह से समर्पित है। केन्द्रीय मंत्री ने पेगासस मामले में सरकार की छवि खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित है।

वहीं सरकार ने ‘एक देश-एक भाषा’ के भी किसी प्रस्ताव को लागू करने से इंकार किया है। केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री जी.किशन रेड्डी ने एक लिखित जवाब में सदन को बताया है कि एक देश-एक भाषा को लागू करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। संविधान में देश की प्रत्येक भाषा को समान महत्व दिया गया है।

सपा सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि ट्रांसजेंडर्स को सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण और अपमानजनक है। हम इस तरह उन्हें अलग नहीं कर सकते। यह बिल संवेदनशील डिटेल्स पर ध्यान नहीं देता है, इसलिए इसे फिर से विचार के लिए भेजा जाना चाहिए।

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