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केंद्रीय मंत्री ने वीपी सिंह से की नरेंद्र मोदी की तुलना, ओबीसी आरक्षण लागू कर गंवाई थी सरकार

6 सितंबर को सवर्ण संगठनों ने एससी-एसटी एक्ट संशोधन के खिलाफ भारत बंद का आह्वान किया था लेकिन पासवान इसे विपक्ष की चाल बताते हैं।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने एससी/एसटी एक्ट के पुराने प्रावधानों की बहाली कराने पर पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है और कहा है कि इससे एससी-एसटी समुदाय में मोदी विरोध की लहर कम होगी। पासवान में प्रधानमंत्री मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह से की जिन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू कर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को नौकरियों में आरक्षण देने का फैसला किया था। एचटी मीडिया से बातचीत में पासवान ने कहा, “हम कह सकते हैं कि देश की राजनीति में दो नेता- नरेंद्र मोदी और वीपी सिंह ही ऐसे हुए जिन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के अधूरे कामों को पूरा किया है।” उन्होंने कहा कि अब लोगों की सोच बदल गई है।

बता दें कि वीपी सिंह ने 1990 में बी पी मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी को आरक्षण देने का फैसला किया था। इसके विरोध में बीजेपी ने वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और वी पी सिंह की सरकार गिर गई थी। कहा जाता है कि तब वीपी सिंह ने कहा था कि भले ही उनकी टांग टूट गई हो लेकिन उन्होंने गोल कर दिया। ओबीसी आरक्षण लागू होने के बाद देशभर में जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा था और कई संगठनों ने राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया था।

एससी-एसटी एक्ट के पुराने प्रावधानों को फिर से बहाल करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने से देश का सवर्ण समुदाय खफा है। पिछले दिनों 6 सितंबर को सवर्ण संगठनों ने एससी-एसटी एक्ट संशोधन के खिलाफ भारत बंद का आह्वान किया था लेकिन पासवान इसे विपक्ष की चाल बताते हैं। पासवान ने कहा कि 25 फीसदी एससी-एसटी आबादी इससे पहले दिग्भ्रमित थी जो अब एकजुट होकर नरेंद्र मोदी के पक्ष में वोट करेगी। उन्होंने गरीब सवर्णों को भी 15 फीसदी आरक्षण देने की वकालत की है। पासवान ने ब्यूरोक्रेसी में लालफीताशाही को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद इस पर अध्यादेश आ गया होता तो इतना हंगामा नहीं होता। सरकार ने इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे लेकिन अफसरों ने अध्यादेश की तैयारी करने में देर कर दी थी। बाद में सरकार को इस पर संशोधन बिल लाना पड़ा।

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