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केंद्रीय मंत्री बोले- 27 हिंदू मंदिर तोड़ बना कुतुब मीनार, तोड़ने वाले ने ही लिखा है

वे बोले, “जिन्होंने यह किया वह लिखकर गए। शताब्दियों तक यह बात चलती रही, किसी ने पढ़ा नहीं, किसी ने जाना नहीं, देखकर ऐसा लगता है कि यह हुआ है। लेकिन इससे बड़ा प्रमाण दुनिया में कहीं नहीं होगा।”

Qutub Minar, Prahlad Patel
दिल्ली स्थित कुतुब मीनार में मौजूद पर्यटक। (फोटो अमित मेहरा- इंडियन एक्सप्रेस)

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर तो विवाद चल ही रहा है, इस बीच कुतुब मीनार के नीचे मंदिर के अवशेष होने और मंदिर को तोड़कर कुतुब मीनार बनाए जाने की भी चर्चा होने लगी है। इसको लेकर पहले भी हंगामा मच चुका है। कुतुब मीनार को विष्णु स्तंभ बताने और वहां भी गणेश जी समेत कई देवताओं की मूर्तियां होने की बातें कही जा रही हैं। इस मामले में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने दावा किया है कि जिसने कुतुब मीनार बनाया है, वह वहां लिखकर गया है कि 27 मंदिरों को तोड़कर इसे बनाया गया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए प्रह्लाद पटेल ने कहा कि “देश के स्वाभिमान से जुड़े तीन स्थान थे, जिस पर देश हमेशा संवेदनशील रहा है- अयोध्या, काशी और मथुरा। कानून बीच में 1991 में आया यह देश को मालूम है। मैं केंद्र में मंत्री था और कुतुब मीनार में फारसी में लिखा हुआ है कि 27 मंदिर तोड़कर इसे बनाया। इसे एएसआई या भारत सरकार ने नहीं लिखा।”

वे बोले, “जिन्होंने यह किया वह लिखकर गए। शताब्दियों तक यह बात चलती रही, किसी ने पढ़ा नहीं, किसी ने जाना नहीं, देखकर ऐसा लगता है कि यह हुआ है। लेकिन इससे बड़ा प्रमाण दुनिया में कहीं नहीं होगा कि जिसने उन मंदिरों को बनाया, वह खुद लिखकर गया कि साहब यह 27 हिंदू मंदिरों और जैन मंदिरों को तोड़कर हमने कुतुब मीनार बनाया।”

प्रह्लाद पटेल ने कहा, “मैं जब संस्कृति मंत्री था तो मैं गया। मैंने कहा कि इसको ट्रांसलेट करके हिंदी और अंग्रेजी में लगा दो, एएसआई ने लगा दिया। मैं उन आलोचना करने वालों और कुतर्क करने वालों से पूछना चाहता हूं कि हम शताब्दियों से उस कलंक को अपनी छाती पर लगाकर रखे हुए हैं। आपने तोड़ा यह तो ठीक है, लेकिन तोड़ने के बाद आप लिखकर गए हैं कि हमने मंदिर तोड़कर यह मीनार बनाई है। यह सच्चाई है।”

उन्होंने बताया कि “हमारी भी आलोचना हुई, लेकिन उस आलोचना से हम इसलिए दुखी नहीं है क्योंकि जब सच्चाई पता चला लोगों को कि वे तो खुद लिखकर गए हैं, मुझे लगता है कि ये जो दुस्साहस है वह हिंदुस्तान की धरती के अलावा दुनिया के किसी भी देश की धरती पर होता तो एक मिनट भी टिक नहीं पाता है। ऐसा मैं मानता हूं।”

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