केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज रद्द होने के कुछ दिनों बाद आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पहली बार टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार किसी भी जरूरी उद्देश्य के लिए जरूरी जमीन वापस ले सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि जहां भी जरूरी होगा, इस प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
क्लब को लिखा गया था पत्र
22 मई को मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय ने क्लब को पत्र लिखकर 5 जून तक जमीन खाली करने को कहा था क्योंकि इसकी जरूरत रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए थी। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “जमीन शहरी विकास का एक बुनियादी पहलू है, अधिकतर मामलों में इसे लीज पर दिया गया है। लीज पर दी गई जमीन को लीज की अवधि खत्म होने पर या उससे पहले भी किसी दूसरे इस्तेमाल के लिए खाली करवाया जा सकता है।”
‘विकास के लिए इसी जमीन का इस्तेमाल’
आगे मंत्री ने कहा, “जो जमीन हम आज वापस ले रहे हैं, उसका इस्तेमाल जरूरतों के हिसाब से किया जाएगा और यह काम जारी रहेगा। जमीन का कोई भी जरिया नहीं है, इसलिए हमें विकास की जरूरतों के लिए इसी जमीन का इस्तेमाल करना होगा।”
मनोहर लाल ने ये टिप्पणियां 11-12 जून को दिल्ली में मंत्रालय की ओर से आयोजित किए जाने वाले ब्रिक्स शहरीकरण मंच पर एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कीं।
पत्र में क्या कहा गया था?
अपने 22 मई के पत्र में भूमि और विकास कार्यालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब को लिखा, “चूंकि यह तय किया गया है कि उक्त परिसर रक्षा बुनयादी ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए अत्यंत जरूरी है।”
आगे कहा गया, “यह दिल्ली के एक अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित है। यह भूमित तत्काल संस्थागत आवश्यकताओं, शासन के बुनियादी ढांचे और जनहित के परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जरूरी है, जिसे आस-पास की सरकार जमीनों को वापस लेने की प्रक्रिया के साथ एकीकृत किया गया है।”
सिर्फ दिल्ली जिमखाना क्लब ही नहीं, बल्कि दिल्ली रेस क्लब समेत अन्य प्रमुख पट्टेदारों से भी जमीन खाली करने को कहा गया है। पिछले हफ्ते, दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस क्लब के खिलाफ भूमि एवं विकास कार्यालय द्वारा शुरू की गई बेदखली की कार्यवाही पर लगी रोक हटा दी।
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