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किसानों की कर्ज माफी पर केंद्रीय मंत्री ने कहा- कांग्रेस को सरकार चलाना नहीं आता

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल के दौरान लिए गए कई फैसलों का देश पर दुष्प्रभाव पड़ा। ऐसे ही फैसलों में से एक फैसला किसानों की कर्जमाफी का था। जयंत सिन्हा ने बताया कि कर्जमाफी के बाद देश में महंगाई दर काफी बढ़ गई थी।

Author Updated: December 19, 2018 10:09 AM
केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा। (image source-pti)

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने के साथ ही कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी की घोषणा कर दी है। वहीं राजस्थान में भी पहली कैबिनेट मीटिंग होने के 10 दिनों के अंदर किसानों की कर्जमाफी करने का वादा कांग्रेस की सरकार द्वारा किया गया है। लेकिन केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने राज्य सरकारों के इस फैसले की आलोचना की है। एक कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस को सरकार चलाना नहीं आता है। उन्होंने कहा कि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल के दौरान लिए गए कई फैसलों का देश पर दुष्प्रभाव पड़ा। ऐसे ही फैसलों में से एक फैसला किसानों की कर्जमाफी का था। जयंत सिन्हा ने बताया कि कर्जमाफी के बाद देश में महंगाई दर काफी बढ़ गई थी।

बता दें कि यूपीए के कार्यकाल के दौरान सरकार ने देश के किसानों का करीब 70000 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया था। जयंत सिन्हा ने तुलना करते हुए बताया कि कांग्रेस के कर्जमाफी के फैसले से महंगाई दर बढ़कर 10 फीसदी तक पहुंच गई थी, वहीं हमारी सरकार के कार्यकाल में यह महज 3-4 फीसदी रही। हालांकि कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कर्जमाफी के फैसलों का बचाव किया। मनीष तिवारी ने कहा कि किसानों की समस्या जटिल है। हमारी सरकार ने साल 2008 में भी किसानों का कर्ज माफ किया था और इस बार भी हम कर्ज माफ कर रहे हैं। कर्जमाफी के लिए पैसा कहां से आएगा, यह फैसला बाद में लिया जाएगा।

इससे पहले इसी कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी राज्य सरकारों द्वारा कर्ज माफी करने के मुद्दे पर कहा था कि कर्जमाफी उन्हीं राज्यों को करनी चाहिए, जिनके पास सरप्लस पैसा हो। अरुण जेटली ने उदाहरण देते हुए बताया कि आंध्र प्रदेश से बंटवारे के बाद तेलंगाना के पास सरप्लस पैसा था। ऐसे में उन्हें कर्जमाफी से कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन पंजाब जैसे राज्यों ने कर्जमाफी का फैसला किया, लेकिन इसके बाद राज्य के पास अन्य विकास कार्यों के लिए सिर्फ 2500 करोड़ रुपए बचे थे। बता दें कि इकोनोमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, राजस्थान पर 3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। ऐसे में यदि राजस्थान की नई कांग्रेस सरकार कर्जमाफी का फैसला करती है तो उसके खजाने पर करीब एक लाख करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

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