ताज़ा खबर
 

मोदी सरकार में बड़ी बग़ावत: मंत्री का इस्तीफा, बिल के विरोध में पुराने साथी अकाली; समझिए पूरा मामला

Union minister Harsimrat Badal’s resignation: अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि अध्यादेशों पर पार्टी से कभी सलाह नहीं ली गई और उनकी पत्नी हरसिमरत ने सरकार को किसानों के आरक्षण के बारे में बताया था।

Author Translated By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 18, 2020 9:04 AM
harsimrat kaur badal, harsimrat kaur badal punjab, akali dal, akali dal protest, akali dal protest punjab, sad leader harsimrat kaur, nda agriculture ordinance, punjab farmers protests, farmers mandi protests, farmers protest, apmc ordinance, punjab farmers protest, farmers protest in punjab, haryana farmers protestकेंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल ने कृषि विधेयक के ख़िलाफ़ केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। (express file)

मनराज ग्रेवल शर्मा

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल ने कृषि विधेयक के ख़िलाफ़ केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। बादल का इस्तीफा सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक कड़ा कदम है। उनका इस्तीफा तीन अध्यादेशों के विरोध में था। मोदी सरकार द्वारा व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक, 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 बिल गुरुवार को लोकसभा में पारित किया गया।

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि अध्यादेशों पर पार्टी से कभी सलाह नहीं ली गई और उनकी पत्नी हरसिमरत ने सरकार को किसानों के आरक्षण के बारे में बताया था। हरियाणा और पंजाब में किसान अध्यादेशों / विधेयकों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी ने विधेयकों के खिलाफ मतदान करने का फैसला किया है।

कुछ दिन पहले तक अकाली दल अध्यादेशों के समर्थन में था। 28 अगस्त को एक दिवसीय पंजाब विधानसभा सत्र से ठीक पहले, सुखबीर बादल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक पत्र जारी किया था जिसमें कहा गया था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीदने की प्रथा अपरिवर्तित रहेगी। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर किसानों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया था। लेकिन अब दोनों भाजपा द्वारा पारित किए गए अध्यादेशों के खिलाफ एक स्वर में बोल रहे हैं।

किसान पंजाब में अकाली दल के वोट बैंक की रीढ़ हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में, सुखबीर बादल ने कहा, “हर अकाली किसान है, और हर किसान अकाली है।” राज्य भर के किसान संघों ने अध्यादेशों के खिलाफ एकजुट होने के लिए अपने राजनीतिक मतभेदों को खत्म कर दिया है। मालवा बेल्ट में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे अध्यादेश का समर्थन करने वाले किसी भी नेता को उनके गांवों में प्रवेश नहीं करने देंगे।

100 साल पुरानी पार्टी अकाली ने 2017 के विधानसभा चुनावों बेहद शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए 117 में से मात्र 15 सीटों जीत थी। ऐसे में वे अपने मुख्य निर्वाचन क्षेत्र के खिलाफ जाने का जोखिम नहीं उठाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के लिए यह उत्तरजीविता का सवाल है, जिसने 2017 से पहले 2007 से लगातार दो बार सत्ता में रही थी। 2017 में एसएडी-बीजेपी गठबंधन ने केवल 15% सीटें हासिल की थी, वहीं कांग्रेस ने 1957 के बाद से अपनी सबसे जोरदार जीत दर्ज की थी।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 नाइजीरिया के एक राज्य में दुष्कर्म को लेकर सख्ती! दुष्कर्मियों को बनाया जाएगा नपुंसक, कानून को मंजूरी
2 गोमांस बेचने के शक में पीट खिलाया था सुअर का मांस, अब NHRC ने दिया पीड़ित को एक लाख रुपये देने का आदेश
3 राजस्थान पैलेस होटल डील में अरुण शौरी को बनाएं आरोपी, कोर्ट ने सीबीआई को दिए निर्देश
IPL Records
X