ताज़ा खबर
 

किसानों की भलाई कर रही है मोदी सरकार, बोले अनुराग ठाकुर तो लोगों ने कर दिया ट्रोल

किसान केन्द्र द्वारा पिछले साल बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर नवंबर, 2020 के अंत से ही दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं।

farmers movementकेंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर। (फोटो- पीटीआई)

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि किसानों के नाम पर वो लोग राजनीति न करें जिन्होंने 60-70 वर्षों तक केवल उनको मजबूर कर दिया था। कर्जे के नीचे दबने के लिए और जब उनकी सरकारें पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आई तो किसानों के लिए बड़े-बड़े वायदे करके कर्जा माफी की बातें कहीं। कांग्रेस ने कभी किसानों का कर्ज माफ नहीं किया, हमारी सरकार उनकी भलाई में काम कर रही है। पीएम मोदी ने किसानों के लिए बहुत काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया, “मोदी सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों के खाते में एक लाख 15 हजार करोड़ रुपये सीधे डाले है। दूसरी बात सरकार ने इस बार के बजट में भी किसानों के लिए 65 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह रकम भी पीएम किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों के खाते में डाले जाएंगे।” अनुराग ठाकुर ने कहा कि नए कृषि कानूनों से किसानों को देश में कही भी, किसी को भी और कभी भी अपनी फसल बेचने और अच्छे दाम लेने का अवसर मिलेगा। उनको आजादी मिलेगी।

हालांकि उनकी दावे को लेकर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उनको ट्रोल करना शुरू कर दिया। उमेश कश्यप @AzadFoj नाम के एक यूजर ने उनको जवाब देते हुए ट्वीट किया, “वो तो दिख ही रहा है कितनी भलाई कर रही है आपकी सरकार, अगर आपकी सरकार किसानो की भलाई और फायदे के बारे मे सोच रही है तो आज किसान रोड पर क्यों है क्यों किसानों को आपकी भलाई और फ़ायदा पसंद नहीं आ रहा है, क्योंकि आपकी और आपकी पार्टी की सारी बातें सिर्फ एक जुमले के अलावा कुछ नहीं है।”

जस्टिस जनता करेगी @JantaKaregi नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “अभी सरकार कहती है कि पेट्रोल या डीजल प्राइवेट कंपनी का होने से महंगा है। जब कृषि कानून लागू हो जाएंगे तब प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से खाना भी महंगा हो जाएगा। जैसा कि सरकार कह रही है कि निजी कंपनियां अपना फायदा देख रही हैं। क्या अब आटा, दाल, चावल को 10 गुना महंगा होने का इंतजार करोगे?”

उधर, केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि अगर किसान कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित रखने और इस दौरान संयुक्त समिति के माध्यम से मतभेद सुलझाने की केन्द्र की पेशकश पर विचार करने को तैयार हों तो सरकार आंदोलनरत किसानों के साथ बातचीत को तैयार है।

सरकार और किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों के बीच अभी तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है और अंतिम बातचीत 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद दोनों पक्षों में बातचीत बंद हो गई।

गौरतलब है कि किसान केन्द्र द्वारा पिछले साल बनए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर नवंबर, 2020 के अंत से ही दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं।

Next Stories
1 रैली में मोदी का नाम ले बोलीं ममता- बंगाल पर गुंडे और बदमाश राज नहीं करेंगे; देश का सबसे बड़ा ‘दंगाबाज’ भी कह डाला
2 जब धीरूभाई को छोड़ने पड़ी थी पढ़ाई, जानें ग़रीबी के दिनों में भी क्यों सस्ती चाय छोड़ बड़े होटल में जाते थे
3 अमेरिका पर परमाणु बमों से हमला करने वाले थे रूस के 108 विमान, छिड़ने वाला था तीसरा विश्वयुद्ध
आज का राशिफल
X