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अमित शाह की सुरक्षा बढ़ी, जहां-जहां जाएंगे, वहां-वहां की सघन जांच करेगी पुलिस

सघन सुरक्षा जांच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सामान्य हैं। इन दोनों को ही राष्ट्रीय सुरक्षा कमांडो (एनएसजी) से जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में 36 सुरक्षाकर्मी मिलते हैं।

Author Updated: September 28, 2018 3:02 PM
भाजपा अध्यक्ष ​​अमित शाह को सीआरपीएफ के 36 कमांडो जेड प्लस सुरक्षा देते हैं। फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव (Express Photo by Prashant Ravi.)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर ताकीद की है कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सुरक्षा पहले से अधिक सख्त और चौकस करें। जिन भी स्थानों पर वह यात्रा करते हैं या किसी भी स्थान पर वह जाते हैं, वहां के सुरक्षा इंतजाम और ज्यादा सख्त किए जाएं। वैसे बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। इस सुरक्षा घेरे के तहत उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के कमांडो का सुरक्षा घेरा हर वक्त मिलता है।

हालांकि अमित शाह पहले ही उच्च श्रेणी के सुरक्षा घेरे में रहते हैं लेकिन पहले से किए गए सुरक्षा इंतजामों के कारण अब राज्य पुलिस के लिए ये अनिवार्य होगा कि वह अमित शाह की सुरक्षा टीम के साथ समन्वय स्थापित करें और जहां भी वह जाते हैं उस स्थान की गहन जांच—पड़ताल करें। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को जेड प्लस सुरक्षा घेरा एनडीए सरकार के सत्ता में आने के कुछ समय बाद ही मिल गया था।

द हिंदू की खबर के मुताबिक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ” कुछ ऐसे भी मौके होते हैं जहां अनिच्छा से जांच की जाती है। लेकिन इस पत्र से हम सुनिश्चित करेंगे कि सारी प्रक्रिया औपचारिक रूप से की जाए और लापरवाही के लिए कोई स्थान न रहे। अब, यहां तक कि वह पुस्तक के विमोचन के लिए या फिर पार्टी की मीटिंग के लिए भी जाते हैं तो वहां भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम हमें करने होंगे।”

वैसे बता दें कि ऐसी सुरक्षा जांच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सामान्य हैं। इन दोनों को ही राष्ट्रीय सुरक्षा कमांडो (एनएसजी) से जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में 36 सुरक्षाकर्मी मिलते हैं, जिसमें कमांडो, उस व्यक्ति की सुरक्षा करते हैं, जिसके ऊपर खतरे का अनुमान केंद्रीय खुफिया एजेंसियां लगाती हैं। केंद्र सरकार सुरक्षा के खतरे के नाम पर वीआईपी सुरक्षा को उचित ठहराती है। ये अनुमान प्राथमिक रूप से इंटेलिजेंस ब्यूरो के आंकलन से तय किया जाता है।

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