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एक बाबा आजकल जहर ख‍िला रहे हैं, उन पर कैसे लगाम लगाएंगे? रामदेव के बारे में पूछने पर बोले स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडव‍िया- लोग अपना द‍िमाग लगाएं

कोरोना वैक्सीन के 200 डोज लगने को लेकर मंडाविया ने कहा कि यह आत्मानिर्भर भारत की एक अविश्वसनीय कहानी थी क्योंकि शोध भारत में हुआ, निर्माण भारत में हुआ।

एक बाबा आजकल जहर ख‍िला रहे हैं, उन पर कैसे लगाम लगाएंगे? रामदेव के बारे में पूछने पर बोले स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडव‍िया- लोग अपना द‍िमाग लगाएं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और बाबा रामदेव(फोटो सोर्स: PTI/फाइल)।

भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है। इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने देश के हेल्थकेयर वर्कर्स और लोगों को बधाई दी है। वहीं इसको लेकर मांडविया ने द इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम एक्सप्रेस अड्डा में कई सवालों के जवाब दिए।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री से तमाम सवालों के बीच बाबा रामदेव को लेकर भी सवाल किया गया। बाबा रामदेव द्वारा सुझाए जाने वाली खाने की चीजों पर उन्होंने कहा कि लोगों को क्या खाना है और क्या नहीं, यह खुद तय करें।

दरअसल कार्यक्रम में सवाल किया गया, “एक निराश बाबा है, डॉक्टर बाबा, जो आजकल लोगों को जहर खिला रहे हैं। हमें गौ मूत्र, घी, शक्कर जैसी चीजें खिला रहे हैं। पूरी दुनिया में एनिमल फैट, ट्रांस फैट पर बैन लगाने की बात हो रही है, लेकिन ट्रांस फैट में हमारे समोसे तले जा रहे हैं, हम लोग खूब घी खा रहे हैं। वहीं बाबा जी टीवी पर नेताओं के साथ अफवाहें फैला रहे हैं, इसपर आप कैसे लगाम लगाएंगे?

इस सवाल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया तो पहले मुस्कराए और फिर कहा, “ये विषय तो आयुष का है लेकिन क्या खाना है और क्या नहीं ये तो व्यक्ति के ऊपर है। लोग खुद अपना दिमाग लगाएं। उनकी तरफ से जो सुझाव आते हैं, वो अपने अनुभव के आधार पर देते है, उसे किसी के लिए मानना कोई कंपल्सरी नहीं है। स्वास्थ्य हमारा है तो इसे कैसे देखना है ये हमारा विषय है।”

जीएसटी से जुड़ा सवाल:

एक्सप्रेस अड्डा कार्यक्रम में रूम रेंट पर पांच फीसदी जीएसटी लगने से जुड़ा सवाल किया गया। केंद्रीय मंत्री से पूछा गया कि आपको नहीं लगता कि सरकार द्वारा निजी अस्पतालों के कमरों पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने के फैसले से सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवा देने की मंशा पर असर पड़ेगा। क्योंकि निजी अस्पतालों और कुछ सरकारी अस्पतालों में जहां प्राइवेट वार्ड हैं, वहां कॉस्ट का भार मरीज पर पड़ता है। ऐसे में क्या इस दर को हटाया जा सकता है? या अस्पताल के जरिए मरीज को किसी तरह से लाभ दिया जा सकता है?

इस सवाल पर केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा, “मैं इस सवाल पर इतना ही कहना चाहूंगा कि दो तरह के हेल्थ केयर हैं, एक तो निजी अस्पताल में मरीज अपना इलाज करवा ले, दूसरा सरकार की सुविधाओं का उपयोग करे। सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करके किसी को कोई असुविधा न हो और उसे हर ट्रीटमेंट मिल जाए, ऐसा हमने सुनिश्चित किया है, इसका लाभ जनता ले भी रही है।”

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