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ऋण लेने के लिए किसानों को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ कवर लेना जरूरी नहीं, सरकार ने किया बड़ा बदलाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी, 2016 में शुरू की गई इस फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह बीमा कवर लेना अनिवार्य रखा गया था। मौजूदा समय में कुल किसानों में से 58 फीसद किसान ऋण लेने वाले हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: February 20, 2020 6:29 AM
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सरकार ने किया बड़ा बदलाव (फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (पीएमएफबीवाई) में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत योजना को स्वैच्छिक बना दिया गया है। मंत्रिमंडल ने 22वें विधि आयोग के गठन और सहायक प्रजनन तकनीक (नियमन) विधेयक को भी मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की खामियों को दुरुस्त करते हुए अब इसे किसानों के लिए स्वैच्छिक बना दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी, 2016 में शुरू की गई इस फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह बीमा कवर लेना अनिवार्य रखा गया था। मौजूदा समय में कुल किसानों में से 58 फीसद किसान ऋण लेने वाले हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएमएफबीवाई में कई बदलावों को मंजूरी दी है क्योंकि किसान संगठन और राज्य इसके संदर्भ में कुछ चिंताएं जता रहे थे। योजना की उपलब्धियों के बारे में तोमर ने कहा कि बीमा कार्यक्रम में 30 फीसद खेती योग्य क्षेत्र को शामिल किया गया है।

डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 4,558 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी गई है। इससे करीब 95 लाख किसानों को फायदा होगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने संवाददाताओं को बताया कि इससे देश में दुग्ध क्रांति में नए आयाम जुड़ेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रिमंडल ने ब्याज सहायता योजना में लाभ को दो फीसद से बढ़ाकर ढाई फीसद करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। सरकार ने यह फैसले किसान समुदाय के हित में किया है।

मंत्रिमंडल ने 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग सरकार को जटिल कानूनी मुद्दों पर सलाह देगा। पूर्व विधि आयोग का कार्यकाल इस वर्ष अगस्त में समाप्त हो रहा है। विधि मंत्रालय अब नए आयोग को अधिसूचित करेगा जिसका कार्यकाल तीन वर्ष होगा।

मंत्रिमंडल ने सहायक प्रजनन तकनीक (नियमन) विधेयक को भी मंजूरी दे दी। इसमें महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की दृष्टि से यह महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके तहत एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री और पंजीकरण प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव किया गया है जो सभी चिकित्सा पेशेवरों व इससे जुड़ी तकनीक का उपयोग करने वाले प्रतिनिधियों पर लागू होगा। इसमें राष्ट्रीय बोर्ड और राज्य बोर्ड गठन की बात कही गई है जो कानूनी रूपरेखा को लागू करने में मदद करेगा।

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