मंत्री अश्विनी चौबे ने शेरनी का नाम रखा महागौरी और शैलजा, शेर का महेश्वर; जिम कॉर्बेट पार्क का भी नाम बदलने का दे चुके हैं सुझाव

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री ने सुझाव दिया है कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलकर रामगंगा करने का सुझाव दिया है। उन्होंने दिल्ली लाए गए तीन शेरों का नामकरण भी कर दिया।

दिल्ली चिड़ियाघर में लाए गए नए नवेले शेर। फोटो- ट्विटर @ANINDYAtimes

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदलकर ‘रामगंगा’ करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के चिड़ियाघर में लाए गए तीन नए-नवेले तीन एशियाटिक शेरों का नामकरण भी कर दिया। नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शेरनियों को गौरी और शैलजा नाम दिया है। वहीं शेर का नाम महेश्वर रखा है। ये शेर गुजरात के सकारबॉग चिड़ियाघर से लाए गए थे।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम पहले भी बदला जा चुका है
अगर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम बदला जाता है तो यह पहली बार नहीं होगा। इससे पहले 1936 में स्थापना के समय इसका नाम हेली राष्ट्रीय पार्क रखा गया था। दो दशक के बाद इसक नाम बदला गया। यह नाम शिकारी से पर्यावरण संरक्षक बने जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया था। अब इसका नाम रामगंगा करने के प्रस्ताव देने के पीछे वजह यह है कि पार्क के बीच से ही गंगा की सहायक नदी रामगंगा गुजरती है।

अश्विनी चौबे ने किए कई और ऐलान
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा हैकि अब गंगीय डॉल्फिन की गिनती की जाएगी। उन्होंने इसके लिए गाइडलाइन भी जारी की है। उन्होंने कहा कि यह एनजीओ, वैज्ञानिकों, सरकार और जानकारों के साथ स्थानीय लोगों का मिलाजुला प्रयास होगा। इसका उद्देश्य डॉल्फिन का संरक्षण है। सुझाव के मुताबिक बिहार और अन्य जगहों पर डॉल्फिन दर्शन केंद्र बनाया जाना चाहिए। इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार का भी विस्तार होगा।

बता दें कि गंगा की कई सहायक नदियों में डॉल्फिन पाई जाती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य को पर्यटन स्थल बनाया जाएगा जिससे देश-विदेश के लोग यहां आएंगे। इससे जुटने वाले फंड का इस्तेमाल इस जीव के संरक्षण में किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार ने प्रोजेक्ट डॉल्फिन के जरिए अन्य जीवों जैसे घड़ियाल, कछुआ, मछली आदि को भी संरक्षित करने का अभियान चलाया है।

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