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मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की, कांग्रेस ने कहा- कोर्ट जाएंगे

कांग्रेस प्रवक्‍ता कपिल सिब्‍बल ने कहा कि अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश को यदि राष्ट्रपति से मंजूरी मिल जाती है तो कांग्रेस इस सिफारिश को अदालत में चुनौती देगी।

Author नई दिल्‍ली | January 25, 2016 10:44 am
कैबिनेट के सहयोगियों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी (FILE: PTI)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे अरुणाचल प्रदेश में रविवार को राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार सुबह कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई। वहीं, कांग्रेस प्रवक्‍ता कपिल सिब्‍बल ने कहा कि अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश को यदि राष्ट्रपति से मंजूरी मिल जाती है तो कांग्रेस इस सिफारिश को अदालत में चुनौती देगी।

इस राज्य में पिछले साल 16 दिसंबर को राजनीतिक संकट शुरू हो गया था, जब कांग्रेस के 21 बागी विधायकों ने भाजपा के 11 सदस्यों और दो निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर एक अस्थाई स्थान पर आयोजित सत्र में विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया पर ‘महाभियोग’ चलाया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस कदम को ‘अवैध और असंवैधानिक’ बताया था। कांग्रेसी मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ जाते हुए पार्टी के बागी 21 विधायकों ने भाजपा और निर्दलीय विधायकों की मदद से एक सामुदायिक केंद्र में सत्र आयोजित किया। इनमें 14 सदस्य वे भी थे जिन्हें एक दिन पहले ही अयोग्य करार दिया गया था। राज्य विधानसभा परिसर को स्थानीय प्रशासन द्वारा ‘सील’ किये जाने के बाद इन सदस्यों ने सामुदायिक केंद्र में उपाध्यक्ष टी नोरबू थांगडोक की अध्यक्षता में तत्काल एक सत्र बुलाकर रेबिया पर महाभियोग चलाया। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्रियों समेत 60 सदस्यीय विधानसभा में 27 विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया था। मुख्यमंत्री ने बाद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार की अनेदखी करते हुए और लोकतंत्र की ‘अभूतपूर्व तरीके से हत्या’ की स्थिति में वे संविधान के संरक्षण के लिए हस्तक्षेप करें।

 

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