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नयी दूरसंचार नीति को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, 2022 तक 40 लाख नौकरियां देगी सरकार

मसौदे में कर्ज के बोझ से दबे दूरसंचार क्षेत्र में नयी जान फूंकने के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क आदि को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्तावित नयी दूरसंचार नीति में सभी को 50 मेगाबिट प्रति सेकेंड की गति वाले ब्रॉडबैंड की पहुंच उपलब्ध कराने, 5जी सेवाओं तथा 2022 तक 40 लाख नए रोजगार के अवसरों के सृजन का प्रावधान है।

Author September 26, 2018 6:49 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नयी दूरसंचार नीति को मंजूरी दे दी। इस नयी नीति को राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी), 2018 का नाम दिया गया है। इसके तहत 2022 तक क्षेत्र में 100 अरब डॉलर का निवेश आर्किषत करने और 40 लाख रोजगार के अवसरों के सृजन का लक्ष्य है। एक आधिकारिक सूत्र ने पीटीआई भाषा से कहा कि मंत्रिमंडल ने एनडीसीपी को मंजूरी दे दी है। नीति के मसौदे के तहत एनडीसीपी द्रुत गति की ब्रॉडबैंड पहुंच बढ़ाने, 5 जी और आप्टिकल फाइबर जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी के उचित मूल्य में इस्तेमाल पर केंद्रित है। मसौदे में कर्ज के बोझ से दबे दूरसंचार क्षेत्र में नयी जान फूंकने के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क आदि को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्तावित नयी दूरसंचार नीति में सभी को 50 मेगाबिट प्रति सेकेंड की गति वाले ब्रॉडबैंड की पहुंच उपलब्ध कराने, 5जी सेवाओं तथा 2022 तक 40 लाख नए रोजगार के अवसरों के सृजन का प्रावधान है।

इसमें डिजिटल संचार तक सतत और कम मूल्य में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ‘स्पेक्ट्रम के महत्तम मूल्य’ के प्रावधान को शामिल किया गया है। स्पेक्ट्रम का ऊंचा मूल्य तथा अन्य संबंधित शुल्क दूरसंचार सेवा क्षेत्र की प्रमुख चिंता है। इस क्षेत्र पर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ है।

इसके अलावा मोदी सरकार ने बुधवार को चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी। इसके तहत गन्ना किसानों को उत्पादन सहायता में दोगुना की वृद्धि की गई है जबकि विपणन वर्ष 2018-19 के लिए 50 लाख टन के निर्यात के लिए मिलों को परिवहन सब्सिडी देना शामिल है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की यहां हुई बैठक में इससे संबंधित खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी । इसमें चीनी मिलों को गन्ने के बकाये के भुगतान में सहयोग के लिए देश में इस समय चीनी के भंडार की समस्या के समाधान का प्रस्ताव है। मिलों पर गन्ना किसानों का 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।

सीसीईए ने चीनी क्षेत्र को मदद के लिए कुल 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इसके तहत गन्ने की उत्पादन लागत को कम करने में मदद तथा देश से चीनी के निर्यात में सहायता शामिल है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इससे चीनी उद्योग के पास नकदी की स्थिति सुधरेगी और उसे गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिलेगी। कुल पैकेज 5,538 करोड़ रुपये का है। इसमें 1,375 करोड़ रुपये का पैकेज मिलों को परिवहन सब्सिडी के रूप में मिलेगा। शेष राशि उत्पादन सहायता के रूप में सीधे गन्ना किसानों के खातों में डाली जाएगी। इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव तथा अगले साल के मध्य में आम चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा हल करना चाहती है। चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए यह दूसरा सरकारी वित्तीय पैकेज है। इससे पहले जून में सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी।

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