आम बजट में दिल्ली मेट्रो यात्रियों के लिए किसी तरह की राहत की घोषणा न होने से राजधानी के लोगों में निराशा है। खासतौर पर मेट्रो किराए में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद आम लोगों को उम्मीद थी कि बजट में मासिक पास या किराए में छूट से जुड़ा कोई पैकेज सामने आएगा लेकिन ऐसा न होने से यात्रियों को सबसे ज्यादा यही बात खटक रही है। बता दें कि दिल्ली मेट्रों में केंद्र की अधिक हिस्सेदारी है।
दिल्ली मेट्रो को राजधानी की ‘लाइफ लाइन’ माना जाता है। रोजाना करीब 65 लाख से 80 लाख यात्री मेट्रो से सफर करते हैं। नौकरीपेशा लोग, छात्र और मध्यम वर्ग के लोग बड़ी संख्या में मेट्रो पर निर्भर हैं। रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि अगर नियमित यात्रियों के लिए किराए में कोई रियायत या मासिक पास की सुविधा दी जाती तो इससे उनकी जेब पर पड़ने वाला बोझ कुछ कम हो सकता था।
मासिक पास या किराए में छूट से जुड़ा कोई पैकेज न आने से लोगों में निराशा
दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर छात्रों ने भी यही राय रखी। छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ रोजाना आने-जाने में मेट्रो किराया एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। उनका मानना है कि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन जब किराया लगातार बढ़ेगा तो लोग मजबूरी में निजी साधनों की ओर रुख करेंगे।
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नौकरीपेशा यात्रियों ने भी बजट को लेकर असंतोष जताया। उनका कहना है कि मध्यम वर्ग को न तो इनकम टैक्स में कोई खास राहत मिली और न ही रोजमर्रा के सफर से जुड़ी परेशानियों पर ध्यान दिया गया। मासिक पास जैसी सुविधा से उन्हें अपने मासिक खर्च की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती थी।
रेल टिकट की बढ़ती कीमतों और ऑनलाइन शुल्क को लेकर आम लोगों में नाराजगी
इसके अलावा रेल टिकट की बढ़ती कीमतों और ऑनलाइन शुल्क को लेकर भी आम लोगों में नाराजगी है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे टिकट पर लगने वाला जीएसटी और अतिरिक्त ऑनलाइन चार्ज मध्यम वर्ग की जेब पर सीधा असर डालता है। लोगों की मांग है कि कम से कम रेलवे टिकट को जीएसटी से मुक्त किया जाए, ताकि सफर सस्ता हो सके। कुल मिलाकर, बजट से दिल्लीवासियों को मेट्रो और रेल यात्रा में राहत की जो उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी।
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