scorecardresearch

60 मिलियन डॉलर का UN स्‍कैंडल:  सस्‍ते घर बनाने के लिए भारत में भी 2.5 मिलियन डॉलर का निवेश पर एक भी मकान नहीं बना

सिंगापुर के व्यवसायी डेविड केंड्रिक के स्वामित्व वाली फर्म को गोवा में 2.5 मिलियन डॉलर में कम से कम 50,000 घर बनाने का काम मिला था।

un| goa| housing investment|
यूनाइटेड नेशन्स (Express File Photo)

संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी द्वारा ऋण और अनुदान से जुड़े 60 मिलियन डॉलर के घोटाले में 2019 में भारत में किफायती घर बनाने के लिए 2.5 मिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल था। हालांकि अभी तक इसे अमल में नहीं लाया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) ने एक ब्रिटिश व्यवसायी को पूरी राशि सौंपी थी और अब उस पर 22 मिलियन डॉलर का कर्ज है।

संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों से पता चलता है कि सिंगापुर के व्यवसायी डेविड केंड्रिक के स्वामित्व वाली फर्म को गोवा में 2.5 मिलियन डॉलर में कम से कम 50,000 घर बनाने का प्रभार मिला था। दिल्ली में एक दंपति अमित गुप्ता और आरती जैन, इस फर्म के निदेशक हैं। सस्टेनेबल हाउसिंग सॉल्यूशंस (SHS) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसके पास अपनी किताबों में दिखाने के लिए बहुत कम है, इस कंपनी ने 27,289 रुपये का घाटा 2020-21 में दर्ज किया है।

यह परियोजना 2018 में शुरू की गई सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर इंपैक्ट इन्वेस्टमेंट्स (S3I) पहल के तहत थी, जिसकी अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा व्यवसायी केंड्रिक से जुड़ी कंपनियों को अपनी सारी फंडिंग आवंटित करने के लिए जांच की जा रही है। UNOPS के प्रमुख ग्रेटे फरेमो ने भी इस महीने की शुरुआत में इस मुद्दे पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस घोटाले ने संस्था को शर्मिंदा किया है। अमित गुप्ता, जो एसएचएस कंपनी के सीईओ हैं, उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि परियोजना को रोक दिया गया है।

गोवा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से पुष्टि की कि गोवा में प्रस्तावित आवास इकाइयों के निर्माण के लिए एसएचएस होल्डिंग्स द्वारा अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन दी गई थी। अधिकारी ने बताया, “परियोजना के लिए किसी भूमि की पहचान नहीं की गई थी। वास्तव में चर्चा उस चरण तक भी नहीं पहुंची, जहां परियोजना के लिए फंड-शेयरिंग पैटर्न पर चर्चा की गई थी।

वहीं अमित गुप्ता ने दावा किया है, “गोवा सरकार ने यूएनओपीएस से संपर्क किया था। फरवरी 2019 में गोवा सरकार के साथ एक समझौता हुआ था और फिर मार्च 2019 में एक पूरक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। हमने उसके बाद कुछ मेल भेजे क्योंकि राज्य हमें भूमि आवंटित करने वाला था। हमने अगस्त-सितंबर 2019 तक मेल भेंजे। जब हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो हमें यूएनओपीएस द्वारा बताया गया कि गोवा सरकार इन घरों को बनाना चाहती थी और अब वे उत्तर नहीं दे रहे हैं। वे जब भी आना चाहें, आ सकते हैं। हमने उसे उसी समय वहीं छोड़ दिया था।”

पढें राष्ट्रीय (National News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.