ताज़ा खबर
 

CAA: UN मानवाधिकार प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की, भारत ने बताया आंतरिक मामला

CAA Supreme Court: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि सीएए भारत के विभाजन की त्रासदी से सामने आए मानवाधिकारों के मुद्दों के संबंध में हमारी तरफ से बहुत पहले जताई गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Author नई दिल्ली | Updated: March 3, 2020 2:52 PM
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने सीएए पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। (Photo: PTI)

CAA Supreme Court: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है और जिनेवा में भारत के स्थायी दूतावास को इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “जिनेवा में हमारे स्थायी दूतावास को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख (मिशेल बैश्लेट) ने सूचित किया कि उनके कार्यालय ने सीएए, 2019 के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है।” उन्होंने कहा, ‘‘हमारा स्पष्ट रूप से यह मानना है कि भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी विदेशी पक्ष का कोई अधिकार नहीं बनता है।’’ कुमार ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है कि सीएए संवैधानिक रूप से वैध है और संवैधानिक मूल्यों का अनुपालन करता है।

उन्होंने कहा, “यह भारत के विभाजन की त्रासदी से सामने आए मानवाधिकारों के मुद्दों के संबंध में हमारी तरफ से बहुत पहले जताई गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत लोकतांत्रिक देश है जो कानून के शासन से चलता है। हम सभी हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं और उसमें पूरा भरोसा करते हैं। हमें भरोसा है कि हमारी मजबूत और कानूनी दृष्टि से टिकने वाली स्थिति को उच्चतम न्यायालय में जीत मिलेगी।”

पिछले सप्ताह भी मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त मिशेल बेशलेट ने संशोधित नागरिकता कानून और दिल्ली में सांप्रदायिक हमलों में ‘‘पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने’’ की खबरों के परिप्रेक्ष्य में बृहस्पतिवार को ‘‘काफी चिंता’’ जताई थी। दुनिया भर में मानवाधिकारों पर हो रही प्रगति को लेकर जिनेवा में मानवाधिकार परिषद् के 43वें सत्र में बेशलेट ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में भी बयान दिए थे। इसके बाद भारत ने यह कड़ा बयान जारी किया था। भारत ने मानवाधिकार निकाय से कहा था कि संशोधित नागरिकता कानून और कश्मीर मुद्दों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले उसके बारे में बेहतर तरीके से जान ले। (भाषा इनपुट के साथ)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 ‘कपिल मिश्रा पूर्व छात्र के नाम पर धब्बा है, उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए’, DSSW ने भाजपा नेता दंगा भड़काने का लगाया आरोप
2 Y कैटेगरी सुरक्षा मिलने के बाद विपक्ष के निशाने पर कपिल मिश्रा, कांग्रेस नेता बोले- 2-4 भड़काऊ और भाषण दे दो Z+ सुरक्षा मिल जाएगी
3 Kerala Sthree Sakthi Lottery SS-199 Today Results: लॉटरी के नतीजे जारी, इस टिकट नंबर को लगा है पहला इनाम