यूनाइटेड नेशन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया कि आज की आर्थिक, डेमोग्रेफिक और जियोपॉलिटिकल स्थितियां 1945 जैसी नहीं हैं, इसलिए संस्थागत ढांचे में यह बात झलकनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिन शनिवार को वैश्विक स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को नियम मानने वाले (rule-taker) की भूमिका से हटकर नियम तय करने वाले (rule-shaper) की भूमिका में आना चाहिए।

‘भारत इसमें सबसे आगे रहा है’

इसी बात को दोहराते हुए एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को कहा, “इस शिखर सम्मेलन में देश बदलती हुई सच्चाई को दिखाते हैं। पिछले कुछ सालों में उभरते हुए बड़े देशों ने यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के विस्तार की मांग की है और भारत इसमें सबसे आगे रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया तेजी से मल्टीपोलैरिटी की ओर बढ़ रही है। इससे ग्लोबल सिस्टम और संस्थाओं में संतुलन और समानता लाने में मदद मिलती है।

यूएन महासचिव ने कहा, “इसके लिए यूएन सिक्योरिटी काउंसिल और ब्रेटन वुड्स सिस्टम समेत वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत है, ताकि वे आज की दुनिया के अनुरूप हो सकें।”

चीन और रूस ने दिया था समर्थन

शनिवार को जारी ब्रिक्स घोषणापत्र में, चीन और रूस ने यूएन (जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है) में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका के लिए अपना समर्थन दिया। घोषणापत्र के मुताबिक, ब्रिक्स देशों के नेताओं ने यूएन में व्यापक सुधार की मांग की है।

यूएन महासचिव ने कहा, “पहला फाइनेंसिंग के जरिए मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंकों को बड़े, बेहतर और अधिक साहसी बनने की जरूरत है। उन्हें एक नए बिजनेस मॉडल के साथ काम करना होगा ताकि भारी मात्रा में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट जुटाया जा सके और विकासशील देशों के लिए रियायती फंडिंग बढ़ाई जा सके।”

उन्होंने आगे कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दशकों के विकास को कुछ ही वर्षों में समेट सकता है। लेकिन इसकी ताकत कुछ ही देशों की कुछ कंपनियों के हाथों में हैं। अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो एआई से पैदा होने वाला अंतर आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता के मामलों में मौजूद अन्य सभी अंतरों को और बढ़ा देगा।”

अमेरिका पर साधा निशाना

क्लाइमेट जस्टिस के मामले पर अमेरिका का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि विकसित देशों को अपने वादे पूरे करने चाहिए- हर साल 300 अरब डॉलर।

उन्होंने कहा कि अहम खनिजों का प्रबंधन जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए, ताकि जिन देशों और समुदायों में इनका उत्पादन होता है, वहां वैल्यू बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों।

शांति की जरूरत पर दिया जोर

यूएन महासचिव ने शांति की जरूरत के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “गाजा से लेकर मिडिल ईस्ट के बड़े संकट, यूक्रेन, सूडान और उससे आगे तक हमारी दुनिया को शांति की जरूरत है। सभी देशों को यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करना चाहिए जिसमें संप्रभु सामनता के सिद्धांत देशों की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक आजादी का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय मानवीयी कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून शामिल हैं।”

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नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट का आयोजन किया गया। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हुए। समिट में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के नेताओं से मिले, तो एक जाना-पहचाना चेहरा उनके साथ बार-बार दिखाई दिया। एक तस्वीर सामने आई जिसमें एक अधिकारी पीएम मोदी और पुतिन के बीच खड़े हैं और यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें