Umar Khalid को Delhi High Court ने दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने उन्हें 1 जून से 3 जून 2026 तक राहत प्रदान की है, ताकि वह अपनी बीमार मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल कर सकें और अपने दिवंगत अंकल के चेहल्लुम (चालीसवीं) की रस्म में शामिल हो सकें।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद को पहले भी अंतरिम जमानत दी जा चुकी है। अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, उमर खालिद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ही रहेंगे और अपने निर्धारित पते पर ठहरेंगे। उन्हें अस्पताल के अलावा किसी अन्य स्थान पर जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, वह केवल एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर सकेंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान Delhi Police ने उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि सर्जरी छोटी है। हालांकि उन्होंने कहा कि पुलिस सुरक्षा के साथ उमर खालिद को कुछ दिनों के लिए अपनी मां से मिलने की अनुमति दी जा सकती है।
गौरतलब है कि उमर खालिद ने अदालत में 15 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें अपनी बीमार मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करनी है और पिछले महीने निधन हुए अपने चाचा की चेहल्लुम रस्म में भी शामिल होना है।
सत्र अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
इससे पहले दिल्ली की सत्र अदालत ने बुधवार को उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी ने खालिद की याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें उसने अपने चाचा के चेहल्लुम (मृत्यु के 40वें दिन की रस्म) में शामिल होने और अपनी मां की देखभाल करने के लिए 15 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी।
उमर खालिद पर UAPA के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज है
उमर खालिद और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर 2020 के दंगों का मुख्य षड्यंत्रकारी होने का आरोप है। दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
