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यूक्रेन बोला- रक्षा मंत्रालय के अफसरों ने ली 17.5 करोड़ की घूस, मदद करे भारत

इस साल 13 फरवरी को यूक्रेन के नैशनल एंटी करप्शन ब्यूरो (NAB) ने कीव स्थित दूतावास के भारतीय राजदूत के जरिए गृह मंत्रालय से मदद मांगी थी।

Author नई दिल्ली | May 31, 2018 9:08 AM
सोवियत निर्मित An-32 का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना ट्रांसपोर्ट के लिए करती है। (File image)

भारतीय सेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट An-32 के कलपुर्जों की खरीदारी में कथित तौर पर 2.6 मिलियन डॉलर (17.55 करोड़ रुपये) की रिश्वत दिए जाने के मामले की यूक्रेन सरकार जांच कर रही है। यूक्रेन के एंटी करप्शन ब्यूरो को शक है कि इस मामले में भारतीय रक्षा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। द इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज के मुताबिक, इस साल 13 फरवरी को यूक्रेन के नैशनल एंटी करप्शन ब्यूरो (NAB) ने कीव स्थित भारतीय दूतावास के राजदूत के जरिए गृह मंत्रालय से मदद मांगी थी। ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनी मदद’ की इस दरख्वास्त में रक्षा मंत्रालय के उन अधिकारियों की जानकारी मांगी गई थी, जो सौदे से जुड़े मोलभाव से लेकर इस पर हस्ताक्षर होने की प्रक्रियाओं आदि से जुड़े थे।

यूक्रेन के सरकारी स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट और भारतीय रक्षा मंत्रालय (वायुसेना मुख्यालय) के बीच 26 नवंबर 2014 को एक सौदा हुआ था। इसके तहत, स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट को भारत के हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को कलपुर्जे सप्लाई करने थे। दस्तावेज के मुताबिक, NAB को इस बात पर शक हुआ कि सौदे के 11 महीने बाद स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट ने एक अनजान सी कंपनी ग्लोबल मार्केटिंग एसपी लिमिटेड से एक करार किया ताकि भारतीय रक्षा मंत्रालय से किए गए सौदे को लागू किया जा सके। NAB के मुताबिक, स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट ने ग्लोबल मार्केटिंग के यूएई में खोले गए एक खाते में 2.6 मिलियन डॉलर की रकम ट्रांसफर की। NAB को शक है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को शायद इस बात की जानकारी हो कि किन हालात में स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट ने ग्लोबल मार्केटिंग नाम की कंपनी से 13 अगस्त 2015 को दूसरा समझौता किया। स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट और एचएएल के बीच मुख्य समझौता नवंबर 2014 में हुआ था।

NAB ने इस बात की जानकारी मांगी है कि भारत और स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट के बीच हुई डील को ‘लागू किए जाने’ में ग्लोबल मार्केटिंग की कोई भूमिका है कि नहीं? क्या भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और ग्लोबल मार्केटिंग के प्रतिनिधियों के बीच कोई संबंध है? इसके अलावा, स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट की ओर से किए भुगतान और अन्य ‘सहायक समझौतों’ में ग्लोबल मार्केटिंग की क्या भूमिका है? उधर, एजेंसी ने दुबई के नूर इस्लामिक बैंक से अगस्त 2015 से लेकर जनवरी 2018 के बीच ग्लोबल मार्केटिंग के खातों से पैसों के लेनदेन की जानकारी मांगी है। उन आईपी एड्रेसेज की भी जानकारी मांगी गई है, जिनसे इन अकाउंट को ऑनलाइन संचालित किया गया। द इंडियन एक्सप्रेस ने NAB को 13 और 16 अप्रैल को ईमेल्स किए। इसके अलावा, 27 अप्रैल को फोन कॉल भी किया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। द इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले पर रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता से भी जानकारी मांगी, लेकिन उनकी टिप्पणी नहीं मिल पाई।

यूक्रेन की राजधानी कीव की एक जिला अदालत ने जांच एजेंसी को दिसंबर 2017 में इस बात की मंजूरी दी कि वह ग्लोबल मार्केटिंग को मिले पैसों के लेनदेन का पता लगाए। पता करे कि इस अपराध में कौन से लोग शामिल थे और उनके स्पेट्सटेक्नोएक्सपोर्ट के अफसरों से क्या रिश्ते थे? बता दें कि सोवियत निर्मित An-32 का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना ट्रांसपोर्ट के लिए करती है। पूर्वी और उत्तरी सीमा पर फौजी टुकड़ियों की तैनाती सुनिश्चित करने में इसकी अहम भूमिका है। शीतयुद्धकालीन यह विमान आपातकालीन प्रबंधन और स्पेशल ऑपरेशन मिशन में भी इस्तेमाल होता है।

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