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यूके में विजय माल्‍या की संपत्तियां होंगी सीज, अदालत ने भारतीय बैंकों के पक्ष में सुनाया फैसला

यूके की हाई कोर्ट ने प्रवर्तन अफसरों को इस बात की इजाजत दे दी है कि वह 62 साल के माल्या की लंदन के पास हर्टफोर्डशायर में स्थित संपत्ति में घुसकर जांच कर सकते हैं। भारतीय बैंकों को माल्या से 9000 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलनी है।

ब्रिटेन के लंदन शहर में वेस्ट मिनिस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में जाता हुआ भारत का भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या। फोटो- रायटर्स

भारत का भगोड़ा शराब कारोबारी और किंग आॅफ गुड टाइम्स कहा जाने वाला विजय माल्या अब मुसीबत में है। यूके की अदालत ने 13 भारतीय बैकों की संयुक्त अपील पर उनके पक्ष में प्रवर्तन का आदेश जारी किया है। भारतीय बैंकों को माल्या से 9000 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलनी है। विजय माल्या पर धोखाधड़ी और हवाला के भी आरोप हैं। यूके की हाई कोर्ट ने प्रवर्तन अफसरों को इस बात की इजाजत दे दी है कि वह 62 साल के माल्या की लंदन के पास हर्टफोर्डशायर में स्थित संपत्ति में घुसकर जांच कर सकते हैं।

इस आदेश के बाद प्रवर्तन विभाग के अधिकारी और उनके एजेंट लेडीवॉक और टेविन के ब्रांबले लॉज, वेलविन में भी जा सकेंगे, जहां वर्तमान में माल्या रह रहा है। हालांकि ये संपत्ति में घुसने का आदेश नहीं है। इसका अर्थ है कि बैंकों के पास ये विकल्प है कि वह इस आदेश का इस्तेमाल करके अपनी बकाया रकम वसूलने के लिए माल्या के पास जा सकते हैं। 26 जून 2018 को जस्टिस बायरन के लिखे आदेश के मुताबिक, हाईकोर्ट के प्रवर्तन अधिकारी, जिसमें प्रवर्तन एजेंट भी शामिल हैं, जो प्रवर्तन अधिकारी के अधीन होंगे, वह लेडीवॉक, क्वीन हू लेन, टेविन, वेलविन और ब्रांबले लॉज समेत लेडीवॉक की सभी बाहरी इमारतों और ब्रांबले लॉज में सर्च और प्रथम आरोपी विजय माल्या के सामान पर नियंत्रण करने के लिए जा सकते हैं।

इस मामले की जानकारी रखने वाले कानूनी अधिकारियों के मुताबिक, हाई कोर्ट की क्वीन बेंच डिवीजन का ये ताजा आदेश भारतीय बैंकों के लिए बड़ी उप​लब्धि है। इससे बैंकों के पास संपत्ति की जांच और प्रवर्तन करने के विकल्पों का अधिकार आ जाता है। ये आदेश यूके की ट्रिब्यूनल कोर्ट और प्रवर्तन एक्ट 2007 से संबंध रखता है। ये आदेश यूके के हाईकोर्ट के मई महीने में दिए पिछले आदेश से भी जुड़ा हुआ है। यूके की हाई कोर्ट ने भारतीय कोर्ट के माल्या की संपत्ति जब्त करने के आदेश को सही बताया था। कोर्ट ने कहा था कि भारतीय बैंकों को पूरा अधिकार है कि वह अपने पैसे की भरपाई करें। ये ​यूके की हाई कोर्ट में कर्ज वसूली प्राधिकरण के मामले में दर्ज किया गया पहला मुकदमा है।

इस मामले में 13 भारतीय बैंक, जिनमें स्टेट बैंक आॅफ इंडिया, बैंक आॅफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडेरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक आॅफ मैसूर, यूको बैंक, युनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट ​रीकांस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ये आदेश इन सभी बैंकों को इंग्लैंड और वेल्स में माल्या की संपत्ति में प्रवर्तन का अधिकार देता है। माल्या ने कोर्ट में बैंकों की अपील के विरोध में अर्जी दाखिल की थी। ये अपील अभी स्वीकृत नहीं की गई है। विजय माल्या, भारत सरकार से पहले ही करीब 9000 करोड़ रुपये के गबन और धोखाधड़ी के मामलों में मुकदमा लड़ रहा है। उसने हाल ही में अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीति से प्रभावित बताया था।

vijay mallya विजय माल्या पिछले साल भारत छोड़कर लंदन भाग गया था। (फाइल फोटो)

उसने लंबे वक्त तक चुप्पी साधे रखने के बाद अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था। उसने कर्नाटक हाई कोर्ट के सामने बीते 22 जून को याचिका दाखिल की थी कि भारत में उसकी संपत्ति की कीमत करीब 13,900 करोड़ रुपये है। वह कोर्ट से इन संपत्तियों को न्यायिक देखरेख में बेचने की अनु​मति चाहता है और बकाएदारों का कर्ज चुकाना चाहता है। जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी शामिल हैं, उसने इस मामले में कोर्ट से निर्देश और संरक्षण की मांग भी की थी।

विजय माल्या ने ट्वीट किया था,”अगर भारत की आपराधिक जांच एजेंसियां जैसे ईडी और सीबीआई मेरे प्रस्ताव पर आपत्ति जताती हैं और संपत्तियों की बिक्री में बाधा पैदा करती हैं, इसका मतलब साफ होगा कि वह मेरे खिलाफ एजेंडे के तहत काम कर रही हैं। वह रिकवरी के बजाय मुझे करप्शन का पोस्टर ब्वॉय बनाना चाहती हैं।”

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